नमस्कार दोस्तों ,
आपकी Paper ki taiyari ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/
) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं
शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-4 व्यक्तित्व एवं समायोजन ( Personality and
Adjustment पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में
मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन
प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए
यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये
भाग-4
- ”व्यक्तिगत एक व्यक्ति के व्यवहार के तरीकों, दृष्टिकोणों, क्षमताओं, योग्यताओं तथा अभिरूचियों का विशिष्टतम संगठन है।” यह कथन है–मन का
- बालक का संवेगात्मक व्यवहार प्रभावित होता है – उपवृक्क ग्रन्थि से
- आत्मकेन्द्रित व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है – अन्तर्मुखी
- सामाजिक अन्तर्क्रिया की दृष्टि से जुंग के अनुसार, व्यक्तित्व के प्रकार हैं – तीन
- ”व्यक्तित्व गुणों का समन्वित रूप है।” यह कथन है – वुडवर्थ का
- ”व्यक्तित्व व्यक्ति के भीतर उन मोशारीरिक गुणों का गत्यात्मक संगठन है जो वातावरण के साथ उसके अअद्वितीय समायोजन को निर्धारित करता है।” यह परिभाषा है – आलपोर्ट की
- व्यक्तित्व को निर्धारित करने वाले कारक हैं – जैविक या अनुवांशिक कारक, पर्यावरण सन्बन्धी कारक
- व्यक्तित्व सम्बन्धी गुण प्राप्त होते हैं – शरीर एवं अन्त:स्रावी ग्रन्थियों से एवं तन्त्रिका तंत्र से
- आत्मकेन्द्रित व्यक्ति को किस वर्ग में रखा जाता है – अन्तर्मुखी
- ‘पर्सोना'(Persona) का अर्थ है ‘ मुखौटा
- मूल्यों के आधार पर व्यक्तित्व का वर्णन किसने किया है – स्प्रेंगर
- कार्ल युंग के अनुसार व्यक्ति – अन्तर्मुखी एवं बहिर्मुखी दोनो होता है।
- हिप्पोक्रेटस के अनुसार व्यक्तित्व के प्रकार हैं – निराशावादी एवं कफ प्रधान
- व्यक्तित्व के प्रकारों का विभाजन जिस आधार पर हुआ है, वह है – शरीर रचना, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
- व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले तत्व हैं – वंशानुक्रम तथा वातावरण
- व्यक्तित्व, व्यक्ति की सम्पूर्ण प्रतिक्रियाओं एवं प्रतिक्रिया सम्भावनाओं का संस्थान है, जैसाकि उसके परिवेश में जो सामाजिक प्राणी है, उसके द्वारा आंका जाता है। यह व्यक्ति के व्यवहारों का एक समायोजित संकलन है, जो व्यक्ति अपने सामाजिक व्यवस्थापन के लिए करता है। यह कथन है – डेशील का
- शैल्डन ने शारीरिक गुणों के आधार पर व्यक्तित्व को किन भागों में बांटा है – कोमल एवं गोलाकार, गोलाकार व आयाताकार, लम्बाकार कोमल
- सिसरो का व्यक्तित्व सम्बन्धी मत किस काल को दर्शाता है – प्राचीन मत
- अन्तर्मुखी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति रुचि रखते हैं – स्वयं अपने में
- व्यक्तित्व आत्मज्ञान का ही दूसरा नाम है। यह किस दृष्टिकोण से सम्बन्धित है – दार्शनिक दृष्टिकोण
- सुविधा की दृष्टि से आगे चलकर मनोवैज्ञानिक ने इस शील गुणों को कितने भागों में विभाजित किया – चार
- बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र व से संबंधित सभी Notes व PDF यहां से Download करें
- व्यक्तित्व, व्यक्ति से सम्बन्धित समस्त मनोवैज्ञानिक क्रियाओं एवं दिशाओं का सम्मिलित स्वरूप है।” यह कहा है – लिण्टन ने
- संगठित व्यक्तित्व की विशेषताएं नहीं है – असामाजिकता
- व्यक्तित्व को समझने के लिए व्यक्तित्व के शील गुणों का अध्ययन किन मनोवैज्ञानिकों ने किया – आलपोर्ट तथा कैटिल ने
- व्यक्तित्व मापन की पुरानी विधि है – ज्योतिष द्वारा
- ‘संगठित व्यक्तित्व’ कहते हैं जिसमें निम्नांकित पक्षों का विकास हुआ हो – सामाजिक, मानसिक एवं संवेगात्मक पक्ष
- वर्तमान में सर्वोत्तम माने जाने वाला व्यक्तित्व के प्रकारों का वर्गीकरण किसकी देन है – जुंग की
- ‘परसोना’ शब्द का लैटिन भाषा में अर्थ होता है – बाहरी रूप रंग या नकली चेहरा
- ”वातावरण के साथ सामान्य एवं स्थायी समायोजन की व्यक्तित्व हैा” इस परिभाषा को लिखा है – बोरिंग ने
- व्यक्तित्व मापन के लिए व्यक्ति की सम्पूर्ण सूचनाएं प्राप्त करने की विधि है – व्यक्ति इतिहास विधि
- व्यक्तित्व की संरचना के अन्तर्गत गत्यात्मकता तथा स्थलाकृतिक पक्षका अध्ययन किस मनोवैज्ञानिक ने किया – फ्रायड
- ”जिस वस्तु के आधार पर एक व्यक्ति की दूसरे से भिन्नता की जा सके, उसे लक्षण कहते हैं।” यह कथन है – मर्फी का
- ”व्यक्तित्व को प्रभावित करने में प्राकृतिक (भौतिक) वातावरण की उपेक्षा नहीं की जा सकती।” यह कथन है – ऑगबर्न व निमकॉफ का
- व्यक्तित्व शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक क्रियाओं का एक रूप ह, जो – गत्यात्मक संगठन है।
- निम्न में से वह जो व्यक्तित्व को प्रभावित नहीं करता है – देखना
- निम्निलिखत व्यक्तिनिष्ठ परीक्षण है – प्रश्नावली विधि
- रेटिंग स्केल विधि, निम्न प्रकार का परीक्षण है – वस्तुनिष्ठ परीक्षण
- रोर्शा परीक्षण मापन करता है – व्यक्तित्व का
- प्रक्षेपण विधि मापन करती है – व्यक्तित्व का
- कथा प्रसंग परीक्षण (T.A.T.) को निर्मित किया है – मुर्रे एवं मॉर्गन ने
- A.T. परीक्षण में प्रयुक्त होने वाले कार्डों की संख्या होती है – 10+10+10
- रार्शास्याही धब्बा परीक्षण में प्रयुक्त होने वाले कार्डों की संख्या होती है – 10
- A.T. का निर्माण किया – लियोपोल्ड बैलक ने
- समायोजन की प्रक्रिया है – गतिशीलता
- अन्तर्मुखी बालक होता है – एकान्त में विश्वास रखने वाला
- अत्यधिक वाचाल, प्रसन्नचित्त करने वाले तथा सामाजिक प्रवृत्ति के धनी वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है – बहिर्मुखी
- कौन-सा प्रेरक जन्मजात नहीं है – आकांक्षा का स्तर
- समायोजन की विधियां है – उदात्तीकरण,प्रक्षेपण प्रतिगमन
- समायोजन दूषित होता है – कुण्ठा एवं संघर्ष से
- एक समायोजित व्यक्ति की विशेषता नहीं है – वैयक्तिक उद्देश्यों का प्रदर्शन
- जब बालक अपनी असफलताओं के दोष किसी और के ऊपर लादने की कोशिश करके अपने तनाव को कम करने का प्रयास करता है, वह विधि कहलाती है – स्थानापन्न समायोजन
- समायोजन नहीं कर पाने का कारण है – द्वन्द्व, तनाव, कुण्ठा
- व्यक्तित्व का कुसमायोजन प्रकट होता है – झगड़ालू प्रवृत्तियों में, पलायनवादी प्रवृत्तियों में, आक्रमणकारी के रूप में
- निम्न में से कुसमायोजित बालक है – परिवेश से अनुकूल बनाने में समर्थहोता है, असामाजिक, स्वार्थीव सर्वथा दु:खी होता है, साधारण-सी बाधा उत्पन्न होने पर मानसिक सन्तुलन खो देता है।
- छात्रों को अपना अधिकतम विकास करने में सहायता देने के लिए – परामर्श की आवश्यकता पड़ती है।
- निम्नलिखित में से कौन-सा मानसिकरूप से स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है – स्व-मूल्यांकन की योग्यता, समायोजनशालता, आत्मविश्वास
- मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का उद्दश्य है – मानसिक रोगों का उपचार करना।
- साधारण शब्दों में हम कह सकते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य सम्पूर्ण व्यक्तित्व का पूर्ण सामंजस्य के साथ कार्य करना है।” ऐसा कहा गया है –हैडफील्ड द्वारा
- मानसिक स्वास्थ्य के निन्लिखित पहलू हैं सिवाय –सांस्कृतिक पहलू
- ”मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का सम्बन्ध मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने और मानसिक असन्तुलन को रोकने से है।” ऐसा कहा गया है –हैडफील्ड द्वारा
- विद्यालय जाने से पूर्व बच्चों को प्रेरणा कहां से मिलती है –घर-परिवार से
- शिक्षा प्रक्रिया की सफलता निर्भर करती है –विद्यार्थी और शिक्षक के मानसिक स्वास्थ्य पर
- मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का निम्न कार्य नहीं है –संक्रामक रोगों की रोकथान करना
- बालक के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने का दायित्व किसका है –परिवार, विद्यालय, समाज का
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- मानसिक अस्वस्थता का कारण नहीं है –निद्रा
- मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का लक्ष्य है –मानसिक रोगों का उपचार
- बालक के सर्वांगीण विकास में भूमिका होती है –मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की
- मानसिक स्वास्थ्य के अभाव में बालक को समझा जाता है –पिछड़ा व मन्द बुद्धि बालक
- मानसिक स्वास्थ्य के अभाव में बालक का विकास अवरुद्ध होता है –मानसिक विकास
- मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है –शिक्षक, शिक्षार्थी व अभिभावक के लिए
- मानसिक स्वास्थ्य का प्रमुख सम्बन्ध है –उचित मानसिक विकास से
- बालकों में मन्द बुद्धि का दोष उत्पन्न होता है –मानसिक स्वास्थ्य के अभाव में
- लैडेल के अनुसार,मानसिक स्वास्थ्य का आशय है –वातावरण के साथ समायोजन से
- हैडफील्ड के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य का आशय है –सम्पूर्ण व्यक्तित्व की समन्वित क्रियाशीलता
- किस विद्वान ने मानसिक स्वास्थ्य का सम्बन्ध सीखे गए व्यवहार से सम्भावित किया है –स्ट्रैन्ज ने
- स्ट्रैन्ज के अनुसार,मानसिक स्वास्थ्य है – सीखे गए व्यवहार एवं वास्तविक जीवन के समायोजन से
- काल मैनिंगर के अनुसार,मानसिक स्वास्थ्य है –सन्तुलित मनोदशा, सतर्क बुद्धि, प्रसन्न एवं सभ्य व्यवहार
- मानसिक स्वास्थ्य को माना जा सकता है –व्यवहार की कसौटी एवं समायोजन की कसौटी
- एक बालक के पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। इस कारण बालक का व्यवहार भी मानसिक अस्वस्थता से सम्बन्धित था। यह प्रभाव है –वंशानुक्रम का
- मानसिक स्वास्थ्य का अभाव सामान्य रूप से पाया जाता है –रोगी व्यक्ति, शारीरिक अस्वस्थ व्यक्ति व कमजोर व्यक्ति में
- शारीरिक विकलांग बालकों में मानसिक स्वास्थ्य का अभाव पाए जाने का प्रमुख कारण है –हीन भावना का उत्पन्न होना
- पारिवारिक निर्धनता बालक के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है –असुरक्षा की भावना उत्पन्न करके, हीन भावना उत्पन्न करके
- निम्नलिखित में कौन-से तथ्य बालक के मानसिक स्वास्थ्य को कुप्रभावित करते हैं –परिवार का कठोर अनुशासन, माता-पिता की उपेक्षा, माता-पिता का अधिक प्यार ये सभी
- निम्नलिखित कौन-सा तथ्य विद्यालयी वातावरण से सम्बन्धित है जो कि बालकों के मानसिक स्वास्थ्य को कुप्रभावित करता है –विद्यालय का कठोर अनुशासन, विद्यालय का अनुचित पाठ्यक्रम, दोषपूर्ण शिक्षण विधियां
- एक शिक्षक द्वारा प्राथमिक स्तर पर व्याख्यान प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव होगा –अनुकूल व प्रतिकूल
- प्राथमिक विद्यालय के पाठ्यक्रम में खेल पर कम तथा अन्य विषयोंके शिक्षण पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव होगा –प्रतिकूल
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