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Monday, October 8, 2018

बाल विकाश और शिक्षाशास्त्र भाग-२ व्यक्तित्व एवं समायोजन ( Personality and Adjustment ) के प्रश्न उत्तर पढ़ने के लिए यह क्लीक करे




personality and adjustment question -answer free download, free pdf
Personality and Adjustment

नमस्कार दोस्तों
आपकी Paper ki taiyari   ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/ ) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-2 व्यक्तित्व एवं समायोजन ( Personality and Adjustment पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये 


  • विस्मृधति का प्रमुख कारण है संवेगात्मदक अस्थिरता, मानसिक आघात, मन्द. बुद्धि होना
  • समय के प्रभाव को विस्मृमति का कारण किस विद्वान ने स्वी‍कार किया है हैरिस ने
  • निरर्थक विषयों की तुलना में सार्थक विषयों की विस्मृनति धीरे-धीरे होती है। यह कथन है मर्सेल का
  • विस्मृ ति कम करने का उपाय है अभ्यानस का
  • विस्मृ ति की स्थिति को कम करता है सस्व‍र वाचन
  • विस्मृ ति को कम करने के लिए आवश्य क है अवधान, स्महरण के नियम, पाठ की पुनरावृत्ति
  • विस्मृ ति का सम्बरन्धव होता है अचेतन मन से
  • थकान की सर्वोत्त म परिभाषा है कार्यकुशलता में कमी
  • थकान के सामान्यत लक्षण है कार्य करने की इच्छा  का अभाव, शरीर में शिथिलता, कार्य क्षमता में लगातार कमी
  • थकानके प्रमुख प्रकार होते हैं दो
  • शरीर का शिथिल होना सूचना देता है शारीरिक थकान का
  • निम्नकलिखित में कौन-सा लक्षण शारीरिक थकान से सम्बकन्धित है कन्धाम झुकाकर बैठना या खड़े होना, कार्य के प्रति उदासीनता, उपकरणों का हाथ से छूटना
  • मानसिक एवं शारीरिक थकानमें सम्बरन्ध  पाया जाता है घनिष्ठम
  • मानसिक कार्य अधिक करने पर बालक में उत्प्न्नध होती है शारीरिक थकान, मानसिक थकान
  • निम्नकलिखित में कौन-सा लक्षण मानसिक थकान से सम्बतन्धित है अवधान केन्द्रीनकरण का अभाव, रुचि का अभाव, स्वा भाव में चिड़चिड़ापन होना
  • थकान के उत्पनन्नअ होने पर बालक अधिगम स्तवर पर क्याह प्रभाव पड़ता है अधिगम स्तरर कम हो जाता है।
  • मानसिक थकान दूर करने के लिए विद्यालय में व्यलवस्थाम होनी चाहिए बाल सभा का, खेलों का
  • शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में छात्र की स्थिति होनी चाहिए थाकान रहित
  • विद्यालय में थकान दूर करने का सर्वोत्तेम साधन है पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाएं
  • क्रो एण्डम क्रो के अनुसार, निर्देशन है एक प्रकार की सहायता
  • निर्देशन की प्रक्रिया को ऐमरी स्ट्रतप्सर ने माना है व्यीक्तिगत हित की प्रक्रिया, सामाजिक हित की प्रक्रिया
  • आर्थर जे. जोन्सऐ के अनुसार, निर्देशन एक प्रक्रिया है बुद्धिमत्तापपूर्वक चुनाव में सहायता की, उचित सम्प्रे ‍षण की, साक्षात्कानर की
  • स्किनर के अनुसार, निर्देशन सहायता करता है समायोजन में, सीखने में
  • चाइसोम के अनुसार, निर्देशन का उद्देश्य  है निहित शक्तियों का विकास का, सामंजस्येपूर्ण जीवन की समस्यााओं का हल का
  • निर्देशन का अन्तिम उद्देश्य  आत्म् निर्देशन है। इस तथ्यन को स्वी्कार किया है थॅमस एम.रिस्कम ने
  • स्किनर के अनुसार,निर्देशन का उद्देश्य‍ है क्षमताओं के अनुसार चुनाव, रुचियों के अनुसार चुनाव, अवसरों के अनुसार चुनाव
  • कुप्पू स्वासमी के अनुसार, निर्देशन की आवश्य्कता रही है वर्तमान, प्राचीन समय में, मध्य काल में
  • व्य्क्तिगत दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यनकता में सम्मिलित किया जा सकता है बालकों को, युवाओं को, वृद्धों को
  • शैक्षिक निर्देशन की आवश्यिकता होती है छात्रों व छात्राओं को
  • समाज में सम्माशन एवं प्रतिष्ठाह प्राप्तर करने के लिए प्रमुख रूप से आवश्यीकता होती है व्यजक्तिगत निर्देशन की
  • सद्भावना, प्रेम एवं समझ विकसित करने के लिए आवश्यतकता होती है सामाजिक निर्देशन की
  • नैतिकता, आध्या त्मिकता एवं आदर्शवादी मूल्योंर के विकास के लिए आवश्यिकता होती है व्यिक्तिगत निर्देशन की
  • अपव्यतय एवं अवरोधन की समस्या् समाधान हेतु आवश्ययक है शैक्षिक निर्देशन
  • शत-प्रतिशत नामांकन के लक्ष्यि को प्राप्तव करने के लिए आवश्य क है शैक्षिक निर्देशन
  • वर्तमान समय में शैक्षिक निर्देशन की आवश्य कता है पाठ्यक्रम विवधता के कारण, व्यायवसायीकरण के कारण
  • शिक्षक ही तरुण व्यीक्तियों को प्रेरित और निर्देशित कर सकता है। यह कथन है लाल बहादुर शास्त्री  का
  • अनुशासनहीनता की समस्या  का समाधान किया जा सकता है व्य क्तिगत व शैक्षिक निर्देशन द्वारा
  • वर्तमान समय में सामाजिक निर्देशन की आवश्यककता है सामाजिक परिवर्तन एवं सामाजिक मूल्यों  के कारण
  • शिक्षा आयोग के अनुसार, निर्देशन है शैक्षिक अवसरों के चुनावों में सहायता, व्यारवसायिक अवसरों में सहायता
  • निम्नंलिखित में कौन-सा तथ्‍य स्मृकति से सम्बनन्धित है इन्द्रिय अनुभव, सक्रिय स्मृ्ति, तर्क
  • विस्मृ ति एक अवधारणा है सकारात्मयक व नकारात्ममक
  • अधिक विस्मृसति की स्थिति में बालक का व्यावहार हो जाता है असामान्य
  • विस्मृिति का आशय है अचेतन मन के अनुभव, किसी तथ्या को भूल जाना।
  • फ्रायड के अनुसार, विस्मृेति का आशय है भूल जाना, दु:खद अनुभवों को स्मृवति से अलग कर देना।
  • बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र व से संबंधित सभी Notes  PDF यहां से Download करें
  •  
  • मन के अनुसार, विस्मृ ति है पुन: स्म्रण की असफलता
  • ड्रेवर के अनुसार, विस्मृ ति का अर्थ है पूर्व अनुभव का स्मणरण करने पर असफलता
  • विस्मृ ति के प्रमुख प्रकार है दो
  • जब व्य क्ति द्वारा किसी दु:खद घटना को भूलने का प्रयास किया जाता है सक्रिय विस्मृसति
  • निष्क्रिय विस्मृिति का आशय है प्रयास न करने पर तथ्योंा को भूल जाना
  • प्राथमिक स्तसर पर छात्र पहाड़े एवं गिनती याद करते हुए भी भूल जाते हैं। इस प्रकार की स्मृथति कहलाती है निष्क्रिय विस्मृएति
  • विस्मृिति के कारणों को विभक्तकिया जा सकता है सामान्य् कारणों के रूप में, सैद्धिान्तिक कारणों के रूप में
  • विस्मृ ति के सैद्धान्तिक कारणों में सम्मिलित किया जा सकता है दमन
  • विस्मृ ति के सामान्य् कारणों में सम्मिलित किया जा सकता है रुचि का अभाव
  • जब छात्र एक पाठ को याद करने के बाद दूसरा पाठ याद करता है तो उस पाठ का विस्मृ ति की सम्भा वना अधिक हो जाती है। यह विस्मृ ति के किस सिद्धान्ता से सम्बकन्धीू है बाधा सिद्धान्तए से
  • विस्मृनति को अभ्याकस के अभाव का कारण किस विद्वान ने माना है थार्नडाइक व एबिंगहार ने
  •  
  • निर्देशन की सहायता से व्यकक्ति का स्पकरूप हो सकता है समाजोपयोगी, राष्ट्रो पयोगी
  • वर्तमान सामाजिक परिवर्तन के अतिरिक्ति किन परिवर्तनों के कारण सामाजिक निर्देशन की आवश्याकता अनुभव की जाती है नैतिक एवं धार्मिक मूल्योंज में परिवर्तन के कारण
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास के कारण किस प्रकार के निर्देशन की आवश्ययकता होती है शैक्षिक निर्देशन की
  • समाज में अन्धेविश्वाकस एवं रूढि़वादिता को दूर करने के लिए प्रमुख रूप से आवश्यिकता होती है शैक्षिक निर्देशन की
  • श्रेष्ठं समायोजन के लिए आवश्यंकता होती है मनोवैज्ञानिक निर्देशन की
  • मनोवैज्ञानिक निर्देशन से आशय है मनोदशा का निर्माण करना
  • अपराधी बालकों को निर्देशन प्रदान करने में आवश्यदकता होती है मनोवैज्ञानिक निर्देशन की
  • एक बालक सामान्यो बालकों की तुलना में कम सीख पाता है तो उसके लिए आवश्य्कता होगी शैक्षिक निर्देशन की
  • स्वा स्य्र्  सम्धीे      निर्देशन का प्रमुख उद्देश्यग होता है छात्रों को स्व स्य्ृति जीवन प्रदान करना, स्वा स्य्र्  सम्बमन्धीप नियमों का ज्ञान, सन्तुयलित भोजन की जानकारी
  • निर्देशन की आवश्यिकता होती है माध्यपमिक स्तंर पर
  • निर्देशन प्रदान करने की प्रमुख विधियां है व्यैक्तिगत एवं सामूहिक विधियां
  • एक छात्र निर्देशनकर्ता से विभिन्नध प्रकार के व्यतवसायों के चुनाव में जानकारी प्राप्त  करता है तो निर्देशनकर्ता द्वारा प्रयोग किया जाएगा व्यैक्तिगत निर्देशन
  • सिनेमा या चित्रपट के माध्यकम से या दूरदर्शन के माध्यसम से सूचनाप्रदान करने की विधि को माना जाएगा सामूहिक निर्देशन विधि
  • निम्नजलिखित में कौन-सा तथ्यध सामूहिक निर्देशन की विधियों से सम्ब न्धित है अनुवर्ती कार्यक्रम
  • निर्देशन प्रक्रिया का क्षेत्र होता है व्यामपक
  • बेवस्टशर शब्दककोश के अनुसार, परामर्श है पूछताछ, पारप् कररिक तर्क-वितर्क
  • बरनॉर्ड एवं फुलमर के अनुसार, परामर्श है व्य क्ति को समझना, व्यपक्ति के साथ कार्य करना।
  • परामर्श को निर्देशन की एक विधि के रूप में जाना जाता है। इस कथन को स्वी कार किया है जोन्स् ने
  • रॉबिन्स न के अनुसार, परामर्श है दो व्यकक्तियों का सम्प र्क
  • परामर्श दो व्य क्तियों का सम्प,र्क है जिसमें एक को किसी प्रकार की सहायता दी जाती है।यह कथन है मायर्स का
  • रोजर्स के अनुसार, पूर्ण मनोवैज्ञानिक परामर्श है अनिर्देशात्मसक
  • स्वरतन्त्रक वातावरण का अभाव किस प्रकार के परापर्श में होता है निर्देशात्महक परामर्श में
  • अनिर्देशात्मवक परामर्श में महत्वभ प्रदान किया जाता है अधिगम में
  • निर्देशात्ममक परामर्श में महत्वभ प्रदान किया जाता है व्यगक्ति को
  • विश्लेशषण की प्रक्रिया को महत्व् प्रदान किया जाता है निर्देशात्म्क परामर्श में
  • परामर्शदाता अधिक सक्रिय रहता है निर्देशात्मदक परामर्श में
  • परामर्श प्रार्थी को क्रियाशील रखने के लिए आवश्य्क होता है अनिर्देशात्मतक परामर्श में
  • अनिर्देशात्मरक परामर्श को पूर्व नियोजित क्रिया किस विद्वान द्वारा समझा जाता है जेम्सश एम. ली. द्वारा
  • डम्बादइल के अनुसार, अवधान का आशय है किसी एक वस्तु  पर अन्य् वस्तुमओं की अपेक्षा अधिक चेतना केन्द्रित करना।
  • मैक्डूेगल के अनुसार, ध्यानन है ज्ञान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली इच्छाम, ज्ञान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला प्रयास
  • मन के अनुसार, अवधान है मानसिक क्रिया
  • वैलेन्टाुइल के अनुसार, अवधान है पूर्ण मानसिक क्रिया
  • स्टानउट के अनुसार, पूर्ण ज्ञान का सम्बवन्धन है पूर्व ज्ञान से
  • कक्षा शिक्षण में बालक की मुख मुद्रा से पता लगाया जा सकता है अवधान की दशा का
  • अवधान की प्रक्रिया में बालक को करना पड़ता है शारीरिक प्रयास व मा‍नसिक प्रयास
  • अवधान के मूल में समाहित होता है प्रयोजन, रुचि, उपयोगिता
  • अवधान के लिए आवश्यमक एवं प्रमुख शर्त है मानसिक सक्रियता
  • वुडवर्थ के लिए अवधान केन्द्रित करने के लिए प्रमुख आवश्याकता है तत्प‍रता
  • अवधान की प्रक्रिया में बालक तथ्योंे के साथ किस क्रिया को करता है संश्ले षण एवं विश्लेकषण
  • सामान्यी रूप से व्यतक्ति अवधान केन्द्रित कर सकता है एक वस्तुल पर
  • निम्न्लिखित में कौन-सा गुण अवधान से सम्बतन्धित है अस्थिरता
  • रूथ स्ट्रैंरग के अनुार, परामर्श का उद्देश्यत है आत्मि परिचय, आत्म  बोध
  • डन्ससमूर के अनुसार, परामर्श का उद्देश्ये है छात्रों में समस्याप का समाधान की योग्य ता प्रदान करना।
  • रॉबर्ट्स के अनुसार, परामर्श का उद्देश्यउ है शैक्षिक समस्यांओं के समाधान में सहायता करना, व्या्वसायिक समस्यानओं के समाधान में सहायता करना, व्य्क्तिगत समस्याेओं के समाधान में सहायता करना।
  • रोलां के अनुसार, परामर्श का उद्देश्यम है छात्रों में हीन भावना के विकास को रोकना।
  • हार्डी के अनुसार, परामर्श का उद्देश्यम है स्व्-विकास के लक्ष्यो प्राप्तं करने में सहायता करना।
  • कुप्पू स्वािमी के अनुसार, परामर्श के सिद्धान्तोंव का विभाजन होता है चार प्रकार से
  • परामर्श अवधि होनी चाहिए 30 से 40 मिनट
  • समायोजन सम्ब न्धीा परामर्श को जाना जाता है नैदानिक परामर्श के नाम से
  • मनोवैज्ञानिक परामर्श में निहित होता है संवेगात्मेक स्थि‍रता व मनोवैज्ञानिक विधियों का प्रयोग
  • निम्नगलिखित में कौन सा तथ्या धार्मिक परामर्श से सम्बदन्धित है नैतिक विकास, आदर्शों का विकास, आध्यांत्मिक विकास
  • शिक्षण अधिगम प्रक्रिया से सम्बतन्धित परामर्श को माना जाता है शैक्षिक परामर्श
  • किसी व्यधवसाय से सम्बबन्धित परामर्श को माना जाता है व्याषवसायिक निर्देशन व व्याावसायिक परामर्श
  • परामर्श को व्य्क्तिगत रूप में स्वीिकार करने वाले तथा सामूहिक रूप में अस्वीरकार करने वाले विद्वान का नाम है रेन
  • परामर्श पारस्प रिक रूप से सीखने की प्रक्रिया है। यह कथन है बिली का एवं एण्ड्रूा का
  • ब्रीवर के अनुसार, परामर्श है विचार-विमर्श व मित्रतापूर्ण वाद-विवाद
  • निर्देशात्मनक परामर्श होता है परामर्शदाता केन्द्रित
  • अनिर्देशात्मुक परामर्श होता है परामर्श प्रार्थी केन्द्रित
  • एक बालक कहानियों की किताबों पर पूर्ण ध्यारन केन्द्रित करता है। उसका यह अवधान माना जाएगा ऐच्छिक अवधान
  • परीक्षा के समय में व्य्स्तू छात्र का ध्या न पड़ोस में बजने वाले टेपरिकार्डर की ओर चला जाता है। उसका यह अवधान माना जाएगा अनैच्छिक अवधान
  • विद्यार्थी गणित विषय में इसलिए अवधान केन्द्रित करने का प्रयास कर रहा है कि यह उसके माता-पिता की इच्छाइ है। उसका यह अवधान माना जाएगा अनभिप्रेरित अवधान
  • एक बालक अपने मित्र को क्रिकेटर बनते हुए देखकर क्रिकेट के प्रत्ये्क कार्यक्रम को ध्याानपूर्वक देखता है तथा उस पर अवधान केन्द्रित करता है। उसका यह अवधान माना जाएगा अर्जित अवधान
  • मन्दिर में भगवान राम-सीता की विशालमूर्ति को देखकर एक व्यैक्ति द्वारा उसका संश्लेाषण एवं विश्ले षण किया जाता है। उसका यह अवधान माना जाएगा मूर्त अवधान
  • एक शिक्षक नैतिक मूल्योंय पर ध्या न केन्द्रित करने के लिए बालक से कहता है? बालक द्वारा अपना ध्या न दया, परोपकार एवं धर्म आदि पर केन्द्रित किया जाता है। उसका यह अवधान होगा अमूर्त अवधान
  • निम्नधलिखित में से कौन-सा तथ्य  अवधान को प्रभावित करता है नवीनता, विषमता, उद्दीपक तीव्रता
  • निम्नतलिखित में कौन-सा उद्दीपक अवधान को सम्भकव बनाता है तीव्र आवात, तीव्र रंग, तीव्र गंध
  • अवधान विक्षेप का कारण है थकान, प्रेरणा का अभाव, भौतिक पर्यावरण
  • कक्षाशिक्षण में शोरयुक्त  वातावरण का परिणाम होता है अवधान विक्षेप, निम्न  अधिगम
  • शिक्षक द्वारा प्राथमिक स्तकर पर व्याकख्यातन विधि का प्रयोग अवधान में उत्पणन्न‍ करेगा बाधा
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  • कक्षा शिक्षण में अवधान केन्द्रित करने के लिए शिक्षक को करना चाहिए शिक्षण अधिगम सामग्री का प्रयोग, उचित शिक्षण विधियों का प्रयोग
  • बालकों का अवधान सदैव किस प्रकार की शिक्षण अधिगम में केन्द्रित होता है रुचिपूर्ण तथा बाल केन्द्रित
  • पुरस्का्र के माध्य म से बालकों को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अवधान केन्द्रित करने के लिए प्रेरित करना माना जाता है सकारात्मशक साधन
  • अवधान रुचि सम्बनन्धित है घनिष्ठ  रूप से
  • कक्षाशिक्षण में अवधान केन्द्रित में शिक्षक की भूमिका होनी चाहिए सहयोगी की तरह
  • कक्षा शिक्षण में अवधान के लिए आवश्य क है उचित शिक्षण विधियां, कक्षा का उचित वातावरण, प्रभावशाली शिक्षण अधिगम प्रक्रिया
  • रुचि शब्द् की उत्पवत्ति किस भाषा के शब्दो से हुई है लैटिन
  • INTERESSE शब्द  किस भाषा का शब्द  है लैटिन
  • INTERESSE शब्द  का अर्थ है अन्त र स्थािपित करना तथा लगाव होना
  • बी. एन. झा. के अनुसार, रुचि है मानसिक विधि, ध्याणन क्रिया को सतत् बनाने वाली
  • क्रो एण्ड  क्रो के अनुसार, रुचि है अनुप्रेरक शक्ति
  • रुचि होती है जन्म,जात व अर्जित
  • रुचियां होती है परिवर्तनशील तथा अपरिवर्तनशील
  • रुचियों का विकास होता है व्य क्तित्वत पर्यावरण की अन्तक:क्रिया के कारण
  • रुचियां प्रभावित होती है सामाजिक स्थिति से तथा आर्थिक स्थिति से
  • ऐच्छिक अवधान का प्रमुख तत्वन है व्यथक्तिगत सुख एवं व्यतक्तिगत उपयोगिता
  • अन अभिप्रेरित अवधान में अधिगमकर्ता को करना पड़ता है स्वत-इच्छााओं का दमन
  • अर्जित अवधान में अधिगमकर्ता में करना पड़ता है इच्छा् एवं रुचि
  • निम्नतलिखित में कौन-सा तथ्यह ऐच्छिक अवधान से सम्ब न्धित है उद्दीपन पर के‍न्द्रीरकरण, अवधान की सक्रियता, आयु के साथ विकास
  • निम्नतलिखित में कौन-सा तथ्यस अनैच्छिक अवधान से सम्ब‍न्धित है बिना इच्छाा के ध्या न केन्द्री करण, आयु का प्रभाव न होना, प्रयास न करना।
  • अवधान की दशाओं का विभाजन प्रमुख रूप से किया जा सकता है दो भागों में
  • निम्न लिखित में अवधान से सम्बयन्धित तथ्यछ है आवश्येकता
  • रुचि से किया हुआ ध्यापन और धयान करना ही रुचि है।यह कथन है मैक्डूागल का
  • निम्नुलिखित में कौन-सा तथ्य  अवधान की आन्तयरिक दशाओं से सम्बरन्धित है समझ, रुचि, आवश्युकता
  • निम्नुलिखित में कौन-सा तथ्य  अवधान की बाह्य दशाओं से सम्ब न्धित है उद्दीपक की प्रकृति एवं उद्देश्यन
  • थार्नडाइक एवं हरबर्ट के अनुसार, अवधानको जाग्रत करने के लिए आवश्यओक है पूर्व ज्ञान को जाग्रत करना।
  • रुचियों के निर्धारण में प्रमुख रूप से भूमिका होती है प्रेरकों की
  • रुचियां पर प्रमुख रूप से प्रभाव होता है लिंग का, सामाजिक स्थिति का, आर्थिक स्थिति का
  • मां अपनी सन्तामन के प्रति रुचि रखती है। इस रुचि को माना जाएगा जन्मजजात
  • कला, विज्ञान एवं राजनीति में रुचि को माना जाता है अर्जित
  • रुचि गुप्तन अवधान है एवं अवधान सक्रिय रुचि है। यह कथन है मैक्डू्गल का
  • रुचि वह स्थिर मानसिक विधि है जो ध्या न क्रिया को सतत बनाती है। यह कथन है बी.एन.झा का
  • कूडर अधिमान लेख में पदों की संख्याय है 168
  • कूडर अधिमान का रुचि मापन क्षेत्र है सीमित
  • कूडर अधिमान लेखा में रुचि मानदण्डों  की संख्याा है 10
  • थर्स्टधन सूची में व्यानवसायिक युग्मों  की संख्या है 100
  • थर्स्टधन रुचि अनुसूची के प्रशासन में समय लगता है 10 मिनट
  • क्ली्टन की रुचि तालिका में कितने प्रतिरूप है 3
  • क्ली्टन की व्या वसायिक रुचि तालिकामें पदों की संख्याह है 630


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