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Wednesday, October 3, 2018

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-1 (व्यक्तित्व एवं समायोजन ( Personality and Adjustment ) के महत्वपूर्ण प्रश्न यहाँ से पढ़े

बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) free pdf download ,paperkitaiyari.blogspot.com
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र 
नमस्कार दोस्तों , 
आपकी Paper ki taiyari   ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/ ) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये 

  • विद्यार्थियों की रूचि को बनाए रखने के लिए शिक्षकों को क्‍या करना चाहिए –प्रश्‍न पूछना
  • शिक्षण एक प्रक्रिया की भांति सम्मिलित करता है –विद्यार्थी, शिक्षक एवं पाठ्यक्रम
  • शिक्षक के रूप में आपको कक्षा में प्रश्‍न क्‍यों पूछने चाहिए –शिक्षण के लिए
  • आपकी राय में ‘शिक्षणको कैसी प्रक्रिया मानना चाहिए छात्र केन्द्रित
  • आप शिक्षण क्‍यों करना चाहते हैं –शिक्षण में मुझे रुचि है।
  • शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद आप क्‍या पसन्‍द करेंगे –कहीं भी शिक्षण कार्य करना।
  • शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने पर आप क्‍या करेंगे यदि आपको शिक्षक का पद नहीं मिलता हैं –देश के किसी भाग में शिक्षक बनने का प्रयास करेंगे।
  • आपने अध्‍यापक का व्‍यवसाय क्‍यों अपनाया –आपको इसमें रुचि है।
  • नीचे कुछ व्‍यवसायों को दिया गया है। यदि इन सबमें एक ही बराबर वेतन हो तो आप किसे पसन्‍द करेंगे –शिक्षक
  • क्‍या आप ऐसे व्‍यवसाय में जाना चाहते हैं जिसमें–आपको शान्ति मिले।
  • केवल शिक्षक ही देश और समाज में जागृति ला सकते हैं क्‍योंकि –वही छात्रों को दिशा दिखा सकता है।
  • प्रभावी एवं सफल शिक्षण के लिए सर्वाधिक आवश्‍यक है –व्‍यावहारिक उदाहरणों द्वारा विषय को स्‍पष्‍ट करना।
  • विद्यार्थियों को प्रदान किया गया शिक्षण प्रभावी हो सकता है, यदि बालकों के मानिसक स्‍तर के अनुरूप शिक्षा दी जाए।
  • अध्‍यापन कार्य को प्रभावशाली बनाने हेतु अध्‍यापक को क्‍या करना चाहिए –पाठ को छात्रों के सहयोग से समझाना चाहिए।
  • इससे पहले कि आप एक नए प्रकरण का शिक्षण दें आपको यह पता लगा लेना चाहिए कि –विद्यार्थी उस प्रकरण के सम्‍बन्‍ध में कितना जानते हैं।
  • सीखना ऐसी प्रक्रिया है जोकि –प्रत्‍येक स्‍थान और प्रत्‍येक समय होती है।
  • आप अध्‍यापक होने के नाते शिक्षण सहायता सामग्री का प्रयोग इसलिए करेंगे क्‍योंकि –इससे विद्यार्थी अधिक अच्‍छी तरह सीखेंगे।
  • शिक्षा के क्षेत्रमें समय-समय पर कमीशनों की क्‍यों आवश्‍यकता होती है – समाज की आवश्‍यकताओं का बदलते रहना, शिक्षा में परिवर्तन होना, पाठ्यक्रम में नवीनीकरण होना।
  • शिक्षण की सबसे उत्‍तम विधि निम्‍नलिखित में से कौन-सी है –प्रोजेक्‍ट विधि
  • श्‍यामपट पर लिखते समय आप क्‍या सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण समझते हैं –लेखन की स्‍पष्‍ट दृश्‍यता
  • शिक्षक का प्रमुख कार्य क्‍या है –छात्र अधिगम को प्रोत्‍साहित व निर्देशित करना।
  • अच्‍छे शिक्षण को विकसित करना चाहिए –अपने स्‍वयं के अध्‍ययन पर निर्भरता।
  • करके सीखना उपयोगी है क्‍योंकि – बच्‍चे करके अधिक अच्‍छा समझते हैं।
  • कक्षा अध्‍यापक के लिए आप निम्‍न में से किस विधि का प्रयोग करेंगे –प्रश्‍नोत्‍तर
  • पढ़ाते समय चित्र दिखाने में सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण लाभ कौन-सा है –इससे पाठ को समझाने में सहायता मिलती है।
  • छात्रों में प्रश्‍न करने की युक्ति का विकास करने हेतु –उनको प्रश्‍न पूछने का अभ्‍यास कराना।
  • यदि छात्र पाठ्य वस्‍तु में रूचि नहीं ले रहे हों तो आप निम्‍नलिखित में से क्‍या करना पसन्‍द करेंगे –अरुचि का कारण जानने का प्रयास करेंगे।
  • यदि छात्रा कक्षा में आपसे प्रश्‍न करते हैं तो आप क्‍या करेंगे –उनको शिक्षण के बाद प्रश्‍न करने को कहेंगे।
  • एक शिक्षक को अपने छात्रों के नाम जानने चाहिए इससे क्‍या लाभ होगा –छात्र गलत कार्य करने से डरेंगे। छात्र शिक्षक के अधिक सम्‍पर्क में आएंगे। छात्र अनुशासित रहेंगे।
  • शिक्षण सफल होता है जबकि –विद्यार्थी समस्‍यात्‍मक स्थितियों के प्रति प्रतिक्रिया सकारात्‍मक ढंग से करते हैं।
  • शिक्षण एवं सीखना होता है –कक्षा के कमरे में और घर दोनों में
  • निम्‍नलिखित में से कौन-सी शिक्षण विधि आपकी राय में सर्वश्रेष्‍ठ है –व्‍याख्‍यान और नोट्स का सम्मिलित रूप 
  • मेरे विचार से नैतिक मूल्‍यों से युक्‍त व्‍यक्तियों को ही –शिक्षण व्‍यवसाय में आना चाहिए।
  • अध्‍यापन व्‍यवसाय में संलग्‍न व्‍यक्ति –जातिवाद से पीडि़त होते है।
  • कक्षा में शिक्षण को उन्‍नत करने के लिए आप –विद्यार्थियों में सामूहिक अन्‍त:क्रिया को प्रोत्‍साहित करेंगे।
  • विघार्थियों के सीखने सम्‍बन्‍धी कठिनाइयों को कम करने के लिए आप क्‍या अच्‍छा समझते हैं –कारणों को जानकर दूर करेंगे।
  • किसी भी देश की सामाजिक उन्‍नति निर्भर करती है –अच्‍छी शैक्षिक व्‍यवस्‍था पर
  • वर्तमान में राष्‍ट्र की प्रगति के लिए आवश्‍यक हे –श्रेष्‍ठ रूप से प्रशिक्षित अध्‍यापक का होना।
  • वर्तमान में राष्‍ट्र की प्रगति के लिए आवश्‍यक है –प्रश्‍नों की सहायता से शिक्षक पाठ समझाने में छात्रों का सहयोग प्राप्‍त कर सकता है।
  • अपने छात्रों को दण्डित करने के लिए आप –ऐसे बालकों को बुलाकर उन्‍हें समझाएंगे तथा उनके बारे में निर्णय लेंगे।
  • आपकी राय में व्‍यावसायिक निर्देशन का कार्यभार किसके ऊपर होना चाहिए –न विद्यालय के शिक्षकों पर, न प्राचार्य पर, न शिक्षक विभाग पर।
  • प्राइवेट शिक्षण केन्‍द्रों का क्‍या मुख्‍य उदे्शय होता है –परीक्षा पास कराना, धन कमाना, विद्यालयों की कमी को पूरा करना।
  • एक शिक्षक को वृत्ति सन्‍तोष उस समय प्राप्‍त होना चाहिए जबकि –उसके विद्यार्थी,जीवन में सफल है।
  • वह शिक्षक अपने विघार्थियों में तनाव उत्‍पन्‍न करते हैं जो कि स्‍वयं –अज्ञानी हैं।
  • शरारती छात्रों के साथ शिक्षक का मुख्‍य उद्देश्‍य क्‍या होना चाहिए –विनम्र, किन्‍तु दृढ़
  • आपके विचार से अच्‍छे शिक्षक का मुख्‍य उद्देश्‍य क्‍या होना चाहिए –जीवन के नये मूल्‍यों, नये विचारों व परितवर्तनों का स्‍वागत करना।
  • अच्‍छा शिक्षक वही है –जो सबके साथ प्रेमव सहानुभूति रखता हो।
  • आप शिक्षक होने के नाते साथी चुनने की पूरी स्‍वतन्‍त्रता पर किसे साथी चुनेंगे –जो अपने बाह्य स्‍वरूप (कपड़े आदि) पर ध्‍यान न देता हो।
  • शिक्षक होने के कारण विघालय की पत्रिका में किस विषय पर लेख लिखना चाहेंगे –विद्यालय में भाईचारे की भावना का छात्रों में विकास
  • कक्षा मे पढ़ाते समय शिक्षक को ध्‍यान में रखना होगा कि –श्‍यामपट कार्य की विषय सामग्री महत्‍वपूर्ण हो।
  • अध्‍यापक छात्रों में लोकप्रिय हो जाता है, यदि वह छात्रों के सुख-दुख और शैक्षणिक कार्यों में सहायता करता है।
  • आपके विचार में निम्‍नलिखित में से कौन-सा गुण एक सफल अध्‍यापक होने के लिए अधिक आवश्‍यक है –विषय वस्‍तु का समुचित ज्ञान होना।
  • विद्यार्थी, अध्‍यापक का सर्वाधिक आदर करेंगे यदि वह अपनेकार्य के प्रति निष्‍ठावान है।
  • आप अध्‍यापक बनना चा‍हते है –समाज को आदर्श एवं स्‍वस्‍थ्‍य जीवन प्रदान करने के लिए
  • अध्‍यापक समाज का आदर्श पुरूष माना जाता है, तो उसकी प्रवृत्ति कैसी होगी त्‍यागमयी
  • शिक्षक बहुधा अपनी कक्षा का सामना नहीं कर पाते, क्‍योंकि उनमें आत्‍म-विश्‍वास की कमी होती है।
  • पढ़ाते समय अध्‍यापक को प्रश्‍न पूछने चाहिए क्‍योंकि –शिक्षा की प्रक्रिया में बालक का स्‍थान केन्‍द्रीय है।
  • शिक्षक को बाल-प्रकृति का ज्ञान क्‍यों होना चाहिए –वह अपने छात्रों को भी आशावादी बना सकेगा।
  • शिक्षक को आशावादी क्‍यों होना चाहिए –कभी-कभी शिक्षक कोस्‍वयं नेतृत्‍व ग्रहण करके छात्रों को यह बताना पड़ता है कि उन्‍हें क्‍या करना है।
  • अच्‍छे शिक्षक के नेतृत्‍व में गुण होते हैं? कारण बताइए उसे प्रभावशाली ढंग से पढ़ाने योग्‍य बनाती है।
  • शिक्षक को मनोविज्ञान की जानकारी उसके शिक्षण कार्य में उसकी सहायता कैसे करती है –इसके अभाव में वह अपने छात्रों के मस्तिष्‍क को प्रखर नहीं बना सकता है।
  • शिक्षक को अपने विषय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए क्‍योंकि इस प्रकार –वह अपने विचार छात्रों के समक्ष आसानी से रख सकता है।
  • योग्‍य शिक्षक का भाषा पर अधिकार क्‍यों होना चाहिए –पूर्णतया सहमत
  • क्‍या आप इस कथन से सहमत हैं- ”शिक्षा की किसी भी योजना में शिक्षक का केन्‍द्रीय स्‍थान होता है।”–अपना कार्य तत्‍परता से कर सकता है।
  • शिक्षक का अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य उसे अपने व्‍यवसाय में किस प्रकार सहायता करता है – पाठ्यक्रम से शिक्षक को क्‍या लाभ होता है शिक्षक को विद्यालय में क्‍या कार्य करने चाहिए उसका ज्ञान हो जाता है।
  • छात्रों में खेल के प्रति रूचि पैदा करने हेतु क्‍या करेंगे –खेलों के महत्‍व पर भाषण देंगे, स्‍वयं उनके साथ खेलेंगे, अच्‍छे खिलाडि़यों के उदाहरण देंगेा।
  • वह शिक्षक सबसे कुशल समझा जाना चाहिए जो –विद्यार्थियोंमेंपहल करने की क्षमता विकसित कर सके।
  • उस शिक्षक को सबसे सफल समझना चाहिए जो कि –विद्यार्थियों को प्रेरित कर सके।
  • कक्षा-शिक्षण की व्‍यवस्‍था निर्भर करती है –शिक्षककी व्‍यावसायिक निपुणता पर
  • शिक्षक तथी अपने छात्रों को प्रभावित कर सकता है जबकि –वह पढ़ाते समय मनोवैज्ञानिक-शिक्षाके सिद्धान्‍तों पर चले।
  • आपने शिक्षण व्‍यवसाय इसलिए अपनाया है, क्‍योंकि इसमें आपको पढ़ने के बहुत अधिक अवसर मिलते हैं।
  • शिक्षकों को –वेश-भूषा आदि बाह्य कारकों पर ध्‍यान नहीं देना चाहिए।
  • कक्षा में आपकी दृष्टि में सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण है –नवीन शिक्षण विधियां
  • एक शिक्षक से आशा की जाती है –उसकी आकांक्षाएं सन्‍तुलित हों।
  • छात्र निम्‍नलिखित में से किस लक्षण के कारण शिक्षक को सर्वाधिक नापसन्‍द करते हैं –पक्षपातपूर्ण व्‍यवहार
  • एक सफल अध्‍यापक वह है, जो विद्यार्थियों के विकास में रुचि लेता है।
  • आप किसको अच्‍छा शिक्षक मानते हैं –कर्तव्‍यनिष्‍ठ
  • आप किस प्रकार के शिक्षकों के साथ सम्‍बन्‍ध नहीं रखना चाहते –जो मिलना-जुलना पसंदन करते हों।
  • शिक्षक में कौन-सा गुण सबसे महत्‍वूपर्ण है –छात्रों की कठिनाइयां दूर करता हो।
  • शिक्षण व्‍यवसाय में महिलाओं की अधिकता क्‍यों है –ये बच्‍चों के साथ अधिक धैर्यपूर्वक व्‍यवहार करती हैं।
  • शिक्षक आधुनिक समाज को अधिक लाभ दे सकते हैं, जबकि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्‍यान दे सकें।
  • एक शिक्षक जो अपने कक्षा शिक्षण में स्‍नायुविक दुर्बलता दर्शाता है, बहुत अधिक सम्‍भव है कि वह पीडि़त है विश्‍वास की कमी से
  • मूल्‍यांकन का क्षेत्र है –सीमित
  • मूल्‍यांकन को मापने की विधि है –परिमाणात्‍मक विधि व गुणात्‍मक विधि
  • मूल्‍यांकन प्रत्‍यय है –विस्‍तृत
  • मूल्‍यांकन एक क्रमिक प्रक्रिया है, जो सम्‍पूर्ण शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्‍न अंग है और यह शैक्षिक उद्देश्यों से घनिष्‍ठ रूप से सम्‍बन्धित है।इस कथन को कहा है कोठारी आयोग ने
  • मूल्‍यांकन का प्रमुख पक्ष है –ज्ञानात्‍मक
  • पाठ्यक्रम कलाकार (शिक्षक) के हाथ में एक साधन है जिससे वह अपने पदार्थ (शिक्षार्थी) को अपने आदर्श (उद्देश्‍य) के अनुसार अपने कलाकक्ष (विद्यालय) में ढाल सके।यह कथन है कर्निंघम का
  • ‘Curriculum’ की उत्‍पत्ति लैटिन भाषा के किस शब्‍द से हुई है –Currere
  • पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धान्‍त हैं –विकासकी सतत क्रिया का, संरक्षण का, भविष्‍य चेतना का एवं खेल व क्रिया का सिद्धान्‍त, सृजनात्‍मकता का एवं प्रजातन्‍त्र भावना के विकास की स्थिति का सिद्धान्‍त
  • पाठ्यक्रम संरचना के आधार में नहीं आता –राजनीतिक
  • निम्‍न में से कौन-सा बिन्‍दु पाठ्यक्रम के सन्‍दर्भ में सत्‍य नहीं है –इससे किसी विषय की सम्‍पूर्ण पढ़ाई नहीं हो पाती है।
  • विद्यालय में किस वर्ग के लोगों की तस्‍वीर टांगना पसन्‍द करेंगे –गांधीजी एवं महात्‍मा बुद्ध वर्ग की
  • किस प्रकार के शिक्षक छात्रों से खुश करते हैं –जो हर बाद खुलकर कहते हों।
  • परीक्षा की कापियां जांचते समय शिक्षक को –उनके लिखित पृष्‍ठों की संख्‍या पर ध्‍यान नहीं देना चाहिए।
  • आपके विचार से शिक्षकों का सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण गुण है –निष्‍पक्ष निर्णय लेने का
  • ऐसे लोगों को शिक्षण में ध्‍यान नहीं देना चाहिए, जो हमेशा आदतों, ढंगों और समय के लिए परेशान रहते हैं।
  • आजकल समाज शिक्षकों को अच्‍छी नजर से नहीं देखता है। इसका क्‍या कारण हो सकताहै –अधिक टयूशन करते हैं, अपना कार्य लगन से नहीं करते हैं, राजनीति में सक्रियभाग लेते हैं।
  • शिक्षक का व्‍यक्तित्‍व आकर्षक क्‍यों होना चाहिए –वह छात्रों को अपने व्‍यक्तित्‍व से प्रभावित कर सकता है।
  • शिक्षक के आत्‍म-विश्‍वास का छात्रों पर क्‍या प्रभाव पड़ता है –उसमें साहस और कार्य करने की इच्‍छा शक्ति जाग्रत होती है।
  • शिक्षक को विद्यालय के अन्‍दर तथा विद्यालय के बाहर आदर्श जीवन बिताना चाहिए, क्‍योंकि समाजमें उसकी मान मर्यादा होती है।
  • विद्यालय में शिक्षक का प्रमुख कार्य होता है –शिक्षण कार्य आयोजित करना।
  • आप निम्‍नलिखित में से किसे सर्वोत्‍तम शिक्षक मानेंगे –जो छात्रों में अन्‍तक्रिया को प्रोत्‍साहित करता है।
  • एक शिक्षक के रूप में आप निम्‍नलिखित में से किस दायित्‍व को सर्वाधिक पसन्‍द करेंगे –बालक की जन्‍मजात क्षमताओं का विकास करना।
  • निम्‍नलिखित में से कौन-सी पाठ्यक्रम सम्‍बन्‍धी क्रिया नहीं है – छात्र परिषद्
  • पाठ्यक्रम निर्माण का सिद्धान्‍त नहीं है –सामाजिक गुणवत्‍ता का
  • पाठ्यक्रम का अर्थकेवल शास्‍त्रीय विषय से नहीं है जिनको विद्यालय में परम्‍परागत ढंग से पढ़ाया जाता है बल्कि इसमें अनुभवों की सम्‍पूर्णता निहित है जिनका बालक बहुतप्रकार की क्रियाओं द्वारा प्राप्‍त करता है।यह कथन किस आयोग का है माध्‍यमिक शिक्षा आयोग
  • पाठ्यक्रम में निहित दोष है –पाठ्यसस्‍तु में अधिक तथ्‍य भरे हैं, ये वैयक्तिक भिन्‍नताओंसे मेल नहीं खाते, ये पुस्‍तकीय ज्ञान पर बल देते हैं।
  • प्राथमिक स्‍तर पर हमारे पूर्वजों के परिचय एवं उनके कार्यों के बारे में पाठ्यक्रम में समावेश का होना संकेत करता है – ऐतिहासिक आधार को
  • विभिन्‍न प्रकार की कविता, संगीत एवं गीतों का समावेश पाठ्यक्रम के आधार को प्रदर्शित करता है सांस्‍कृतिक आधार को
  • पाठ्यक्रम के सांस्‍कृतिक आधार का आशय है – पाठ्यक्रम में सांस्‍कृतिक तथ्‍यों का समावेश, स्‍थानीय गीत-संगीत एवं कविताओं का समावेश
  • पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक आधार का आशय है – पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक गतिविधियों का समावेश, वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करने वाली गितिविधि
  • सामूहिक आधार पर सम्‍पन्‍न होने वाली क्रियाओं का पाठ्यक्रम में समावेश प्रदर्शित करता है – सामाजिक आधार को
  • पाठ्यक्रम के प्रभावी एवं समग्र रूप को विकसित करने के लिए आवश्‍यक है – दार्शनिक आधार, सामाजिक आधार, सांस्‍कृतिक आधार
  • निम्‍नलिखित में कौन-सा पाठ्यक्रम प्रमुख रूप से मनोवैज्ञानिक आधार पर निर्मित होता है – बाल केन्द्रित पाठ्यक्रम
  • पाठ्यक्रम निर्माण के समक्ष ध्‍यान दिया जाता है – सामाजिक आकांक्षाओं का, बालकों की रुचित एवं स्‍तर का
  • कोर पाठ्यक्रम का प्रमुख सम्‍बन्‍ध होता है – सामाजिक दृष्टिकोण से
  • 6 से 14 वर्ष के बालकों के लिए नि:शुल्‍क एवं अनिवार्य शिक्षा का कानून लागू हुआ – 1 अप्रैल, 2010 से
  • विद्यालयों में गरीब बच्‍चों के लिए शिक्षा के अधिकार कानून के अन्‍तर्गत कितने प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी – 25 प्रतिशत
  • शिक्षा के अधिकार कानून में 25 प्रतिशत गरीब बच्‍चों के लिए आरक्षण किस प्रकार के विद्यालयों में होगा व्‍यक्तिगत विद्यालयों में, सरकारी विद्यालयों में
  • शिक्षा के अधिकार अधिनियम जोड़ा गया है – मौलिक अधिकारों में
  • शिक्षा के अधिकार अधिनियम के लिए जोड़ा गया अनुच्‍छेद है – 21 A
  • शिक्षण अधिकार अधिनियम के अनुसार, बालकों को स्‍कूल उपलब्‍ध कराने की दूरी होगी – 1 किमी
  • शिक्षक अधिकार अधिनियम के अनुसार, सत्र प्रारम्‍भ होने के किस माह बाद तक विद्यालय में प्रवेश दिया जा सकेगा – 6 माह
  • शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार, 6 वर्ष छोटे बालकों के लिए व्‍यवस्‍था होगी प्री स्‍कूलिंग
  • क्‍यूररे (Currere) का अर्थ है दौड़ का मैदान
  • क्रिया-केन्द्रित पाठ्यक्रम की विचारधारा के पोषक थे –डीवी
  • राष्‍ट्रीय नीति के अन्‍तर्गत पाठ्यक्रम –बालक केन्द्रित होना चाहिए।
  • पाठ्यक्रम सम्‍बन्‍धी क्रिया नहीं है –वाद-विवाद व भाषण
  • पाठ्यक्रम के प्रकार हैं –बाल केन्द्रित एवं विषय केन्द्रित, अनुभव केन्द्रित एवं कोर पाठ्यक्रम, शिल्‍कला केन्द्रित, कार्य केन्द्रित तथा सुसम्‍बद्ध या सम्‍बन्धित पाठ्यक्रम
  • विषय-केन्द्रित पाठ्यक्रम है –विषय को आधार बनाया जाता है।
  • क्रियाप्रधान पाठ्यक्रम में –बालकों की क्रियाओं एवं अनुभवों पर बल दिया जाता है।
  • प्राथमिक स्‍तर पर पाठ्यक्रम होना चाहिए – गतिविधि आधारित
  • पाठ्यक्रम में दार्शनिक आधार से आशय है – पाठ्यक्रम में दार्शनिक विचारों का समावेश
  • प्राथमिक स्‍तर पर बालकों में सत्‍य, अहिंसा एवं शाश्‍वत मूल्‍यों से सम्‍बन्धित पाठ्य-वस्‍तु प्रदर्शित करती है पाठ्यक्रम के दार्शनिक आधार को
  • पाठ्यक्रम के मनोवैज्ञानिक आधार का आशय है – छात्रों के स्‍तर एवं रुचि के पाठ्क्रम से
  • वर्तमान में प्राथमिक स्‍तर पर खेल एवं गतिविधियों का प्रयोग प्रदर्शित करता है – मनोवैज्ञानिक पाठ्यक्रम की अवधारणा को
  • शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 निजी स्‍कूलों को प्रतिबन्धित किया गया है कैपीटेशन फीस के लिए, स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट के लिए
  • शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के अनुसार, विशेष शिक्षक की नियुक्ति विद्यालयों में होगी विकालांग बालकों के लिए, मन्‍द्र बुद्धि बालकों के लिए
  • सुरक्षा का अधिकार बाल अधिकार के किन अनुच्‍छेदों में समाहित है – 19, 32, 35, 36, 11, 37
  • स्‍टर्ट एवं ओकडन के अनुसार, स्‍मृति एक प्रक्रिया है शारीरिक एवं मानसिक
  • प्रतिमा या छाप का निर्माण होता है – ज्ञान केन्‍द्र में
  • अनुभव का स्‍मृति चिन्‍ह कहते हैं – प्रतिमा को, छाप को
  • प्रारंभिक अनुभव मानव मस्तिष्‍क में एकत्रित होते हैं – चेतन मस्तिष्‍क में
  • अनुभव प्राचीन या पुराने होने पर चले जाते हैं – अचेतन मन में
  • स्‍मृति का आशय है – सचेतन मन के अनुभवों को चेतन मन में लाने की प्रक्रिया
  • जेम्‍स के अनुासर, स्‍मृति है पूर्व घटना या तथ्‍य का ज्ञान
  • मैक्‍डूगल के अनुसार, स्‍मृति का आशय है अतीत की घटनाओं की कल्‍पना करना।
  • निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य स्‍मृति से सम्‍बन्धित है– आदर्श पुनरावृत्ति, अतीत की घटनाओं की कल्‍पना, अतीत के अनुभवों को चेतना में लाना।
  • वुडवर्थ के अनुसार, स्‍मृति के अंग होते हैं चार
  • किसी तथ्‍य को अच्‍छी तरह सीख लेना स्‍मृति की आधी लड़ाई जीत लेना हैयह कथन है गिलफोर्ड का
  • अच्‍छी स्‍मृति के लिए आवश्‍यक है – उच्‍च अधिगम, उच्‍च धारण शक्ति, पुन:स्‍मरण
  • उच्‍च धारण शक्ति से आशय है – अचेतन मन में तथ्‍यों का संग्रहण
  • अधिकांशत: व्‍यक्तियों की धारण शक्ति में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। यह कथन है – रायबर्न को
  • स्‍टाउट के अनुसार, उत्‍तम स्‍मृति के लिए आवश्‍यक है उत्‍तम धारण शक्ति
  • सामान्‍य रूप से अच्‍छी स्‍मृति पायी जाती है – प्रतिभाशाली बालकों में
  • स्‍टाउट के अनुसार, उच्‍च स्‍मृति की विशेषता है उपयोगी तथ्‍यों की स्‍मृति, अनुपयोगी तथ्‍यों की विस्‍मृति, उच्‍च धारण शक्ति
  • विद्यालयों में कार्य करने वाले शिक्षकों की प्रशिक्षण स्थिति होगी – केवल प्रशिक्षित शिक्षक
  • शत-प्रतिशत नामांकन के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने की समय सीमा होगी – तीन वर्ष
  • शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 में प्रावधानों की संख्‍या है नौ
  • बाल अधिकारों का प्रमुख उद्देश्‍य है – बालकों का सर्वागीण विकास, बालकों को सम्‍भावित खतरों से बचाना, बालकों को सभी को शैक्षिक एवं अशैक्षिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति
  • बाल अधिकारों को उपलब्‍ध कराने का उत्‍तरदायित्‍व होगा – सरकार का
  • बालकों के साथ किसी जाति-धर्म एवं लिंग के आधार पर भेदभाव न करने का प्रावधान किस अनुच्‍छेद के अनुसार है – दो
  • बालकों को यह जानने का अधिकार किस अनुच्‍छेद के अन्‍तर्गत है कि अनकी उ‍ि देखभाल अभिभावकों के द्वारा की जा रही है या नहीं – सात
  • शरणार्थी को देश में जन्‍में बालक के समान अधिकार किस अनुच्‍छेद में प्रदान किया गया है – 22
  • बाल अधिकार के अनुच्‍छेद 24 के अन्‍तर्गत बालकों को अधिकार है स्‍वास्‍थ्‍य का
  • विकलांग बालकोंको विशेष सहयोग एवं देखभाल का अधिकार बाल अधिकार के अनुच्‍छेद के अनुसार है – 23
  • प्राथमिक शिक्षा को नि:शुल्‍क रूप से प्राप्‍त करने का अधिकार बाल अधिकारके किस अनुच्‍छेद से सम्‍बन्धित है – 28
  • बाल अधिकार का अनुच्‍छेद 19 बालकों को अधिकार प्रदान करता है उपेक्षा से, हिंसा से, दुर्व्‍यवहार से सुरक्षा का
  • बालकों को खतरनाक कार्यों से मुक्‍त रखने की व्‍यवस्‍था बाल अधिकार के किस अनुच्‍छेद में प्रदत्‍त की गई है – 32
  • बालकों के अपहरण एवं क्रय-विक्रय को रोकने का दायित्‍व होगा – सरकार का
  • सहभागिता एवं सक्रिया अभिव्‍यक्ति का अधिकार बाल अधिकार के किन अनुच्‍छेदों में समाहित है – 13, 14, 15, 16, 17
  • सत्‍याग्रह एवं सविनय अवज्ञा आन्‍दोलन के बारे में बालक से महात्‍मा गांधी के पूर्ण जीवन चरित्र का स्‍मरण होना स्‍मृति के किस नियम को प्रकट करता है – सम्‍बन्‍धों का नियम
  • आदत का नियम सम्‍बन्धित है – अभ्‍यास से
  • बालक जो पहाड़े प्राथमिक स्‍तर पर सीखता है। वह उसको जीवन पर स्‍मृति के किस नियम के आधार पर याद रहते हैं – आदत या अभ्‍यास का नियम
  • एक बालक अपने पिता की मृत्‍यु को याद करना नहीं चाहता है तो विस्‍मृति के किस सिद्धान्‍त का अनुकरण करता है – दमन सिद्धान्‍त
  • विस्‍मृति का प्रमुख कारण है – संवेगात्‍मक अस्थिरता, मानसिक आघात, मन्‍द बुद्धि होना
  • समय के प्रभाव को विस्‍मृति का कारण किस विद्वान ने स्‍वीकार किया है – हैरिस ने
  • निरर्थक विषयों की तुलना में सार्थक विषयों की विस्‍मृति धीरे-धीरे होती है। यह कथन है – मर्सेल का
  • विस्‍मृति कम करने का उपाय है – अभ्‍यास का
  • विस्‍मृति की स्थिति को कम करता है – सस्‍वर वाचन
  • विस्‍मृति को कम करने के लिए आवश्‍यक है – अवधान, स्‍मरण के नियम, पाठ की पुनरावृत्ति
  • विस्‍मृति का सम्‍बन्‍ध होता है – अचेतन मन से
  • थकान की सर्वोत्‍तम परिभाषा है – कार्यकुशलता में कमी
  • थकान के सामान्‍य लक्षण है – कार्य करने की इच्‍छा का अभाव, शरीर में शिथिलता, कार्य क्षमता में लगातार कमी
  • थकानके प्रमुख प्रकार होते हैं – दो
  • शरीर का शिथिल होना सूचना देता है – शारीरिक थकान का
  • निम्‍नलिखित में कौन-सा लक्षण शारीरिक थकान से सम्‍बन्धित है – कन्‍धा झुकाकर बैठना या खड़े होना, कार्य के प्रति उदासीनता, उपकरणों का हाथ से छूटना
  • मानसिक एवं शारीरिक थकानमें सम्‍बन्‍ध पाया जाता है – घनिष्‍ठ
  • मानसिक कार्य अधिक करने पर बालक में उत्‍पन्‍न होती है – शारीरिक थकान, मानसिक थकान
  • निम्‍नलिखित में कौन-सा लक्षण मानसिक थकान से सम्‍बन्धित है – अवधान केन्‍द्रीकरण का अभाव, रुचि का अभाव, स्‍वाभाव में चिड़चिड़ापन होना
  • थकान के उत्‍पन्‍न होने पर बालक अधिगम स्‍तर पर क्‍या प्रभाव पड़ता है – अधिगम स्‍तर कम हो जाता है।
  • मानसिक थकान दूर करने के लिए विद्यालय में व्‍यवस्‍था होनी चाहिए – बाल सभा का, खेलों का
  • शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में छात्र की स्थिति होनी चाहिए – थाकान रहित
  • विद्यालय में थकान दूर करने का सर्वोत्‍तम साधन है – पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाएं
  • क्रो एण्‍ड क्रो के अनुसार, निर्देशन है एक प्रकार की सहायता
  • निर्देशन की प्रक्रिया को ऐमरी स्‍ट्रप्‍स ने माना है – व्‍यक्तिगत हित की प्रक्रिया, सामाजिक हित की प्रक्रिया
  • आर्थर जे. जोन्‍स के अनुसार, निर्देशन एक प्रक्रिया है बुद्धिमत्‍तापूर्वक चुनाव में सहायता की, उचित सम्‍प्रे‍षण की, साक्षात्‍कार की
  • स्किनर के अनुसार, निर्देशन सहायता करता है समायोजन में, सीखने में
  • चाइसोम के अनुसार, निर्देशन का उद्देश्‍य है निहित शक्तियों का विकास का, सामंजस्‍यपूर्ण जीवन की समस्‍याओं का हल का
  • निर्देशन का अन्तिम उद्देश्‍य आत्‍म निर्देशन है। इस तथ्‍य को स्‍वीकार किया है – थॅमस एम.रिस्‍क ने
  • स्किनर के अनुसार,निर्देशन का उद्देश्‍य है क्षमताओं के अनुसार चुनाव, रुचियों के अनुसार चुनाव, अवसरों के अनुसार चुनाव
  • कुप्‍पूस्‍वामी के अनुसार, निर्देशन की आवश्‍यकता रही है वर्तमान, प्राचीन समय में, मध्‍यकाल में
  • व्‍यक्तिगत दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्‍यकता में सम्मिलित किया जा सकता है – बालकों को, युवाओं को, वृद्धों को
  • शैक्षिक निर्देशन की आवश्‍यकता होती है – छात्रों व छात्राओं को
  • समाज में सम्‍मान एवं प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त करने के लिए प्रमुख रूप से आवश्‍यकता होती है – व्‍यक्तिगत निर्देशन की
  • सद्भावना, प्रेम एवं समझ विकसित करने के लिए आवश्‍यकता होती है सामाजिक निर्देशन की
  • नैतिकता, आध्‍यात्मिकता एवं आदर्शवादी मूल्‍यों के विकास के लिए आवश्‍यकता होती है व्‍यक्तिगत निर्देशन की
  • अपव्‍यय एवं अवरोधन की समस्‍या समाधान हेतु आवश्‍यक है – शैक्षिक निर्देशन
  • शत-प्रतिशत नामांकन के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए आवश्‍यक है – शैक्षिक निर्देशन
  • वर्तमान समय में शैक्षिक निर्देशन की आवश्‍यकता है – पाठ्यक्रम विवधता के कारण, व्‍यावसायीकरण के कारण
  • शिक्षक ही तरुण व्‍यक्तियों को प्रेरित और निर्देशित कर सकता है। यह कथन है – लाल बहादुर शास्‍त्री का
  • अनुशासनहीनता की समस्‍या का समाधान किया जा सकता है – व्‍यक्तिगत व शैक्षिक निर्देशन द्वारा
  • वर्तमान समय में सामाजिक निर्देशन की आवश्‍यकता है – सामाजिक परिवर्तन एवं सामाजिक मूल्‍यों के कारण
  • शिक्षा आयोग के अनुसार, निर्देशन है शैक्षिक अवसरों के चुनावों में सहायता, व्‍यावसायिक अवसरों में सहायता
  • निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य स्‍मृति से सम्‍बन्धित है – इन्द्रिय अनुभव, सक्रिय स्‍मृति, तर्क
  • विस्‍मृति एक अवधारणा है – सकारात्‍मक व नकारात्‍मक
  • अधिक विस्‍मृति की स्थिति में बालक का व्‍यवहार हो जाता है – असामान्‍य
  • विस्‍मृति का आशय है – अचेतन मन के अनुभव, किसी तथ्‍य को भूल जाना।
  • फ्रायड के अनुसार, विस्‍मृति का आशय है भूल जाना, दु:खद अनुभवों को स्‍मृति से अलग कर देना।
  • मन के अनुसार, विस्‍मृति है पुन: स्‍मरण की असफलता
  • ड्रेवर के अनुसार, विस्‍मृति का अर्थ है पूर्व अनुभव का स्‍मरण करने पर असफलता
  • विस्‍मृति के प्रमुख प्रकार है – दो
  • जब व्‍यक्ति द्वारा किसी दु:खद घटना को भूलने का प्रयास किया जाता है – सक्रिय विस्‍मृति
  • निष्क्रिय विस्‍मृति का आशय है – प्रयास न करने पर तथ्‍यों को भूल जाना
  • प्राथमिक स्‍तर पर छात्र पहाड़े एवं गिनती याद करते हुए भी भूल जाते हैं। इस प्रकार की स्‍मृति कहलाती है – निष्क्रिय विस्‍मृति
  • विस्‍मृति के कारणों को विभक्‍त किया जा सकता है – सामान्‍य कारणों के रूप में, सैद्धिान्तिक कारणों के रूप में
  • विस्‍मृति के सैद्धान्तिक कारणों में सम्मिलित किया जा सकता है – दमन
  • विस्‍मृति के सामान्‍य कारणों में सम्मिलित किया जा सकता है – रुचि का अभाव
  • जब छात्र एक पाठ को याद करने के बाद दूसरा पाठ याद करता है तो उस पाठ का विस्‍मृति की सम्‍भावना अधिक हो जाती है। यह विस्‍मृति के किस सिद्धान्‍त से सम्‍बन्‍धी है – बाधा सिद्धान्‍त से
  • विस्‍मृति को अभ्‍यास के अभाव का कारण किस विद्वान ने माना है – थार्नडाइक व एबिंगहार ने 
  • निर्देशन की सहायता से व्‍यक्ति का स्‍परूप हो सकता है – समाजोपयोगी, राष्‍ट्रोपयोगी
  • वर्तमान सामाजिक परिवर्तन के अतिरिक्‍त किन परिवर्तनों के कारण सामाजिक निर्देशन की आवश्‍यकता अनुभव की जाती है – नैतिक एवं धार्मिक मूल्‍यों में परिवर्तन के कारण
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास के कारण किस प्रकार के निर्देशन की आवश्‍यकता होती है – शैक्षिक निर्देशन की
  • समाज में अन्‍धविश्‍वास एवं रूढि़वादिता को दूर करने के लिए प्रमुख रूप से आवश्‍यकता होती है – शैक्षिक निर्देशन की
  • श्रेष्‍ठ समायोजन के लिए आवश्‍यकता होती है – मनोवैज्ञानिक निर्देशन की
  • मनोवैज्ञानिक निर्देशन से आशय है – मनोदशा का निर्माण करना
  • अपराधी बालकों को निर्देशन प्रदान करने में आवश्‍यकता होती है – मनोवैज्ञानिक निर्देशन की
  • एक बालक सामान्‍य बालकों की तुलना में कम सीख पाता है तो उसके लिए आवश्‍यकता होगी – शैक्षिक निर्देशन की
  • स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍ब‍न्‍धी निर्देशन का प्रमुख उद्देश्‍य होता है – छात्रों को स्‍वस्‍थ्‍य जीवन प्रदान करना, स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी नियमों का ज्ञान, सन्‍तुलित भोजन की जानकारी
  • निर्देशन की आवश्‍यकता होती है – माध्‍यमिक स्‍तर पर
  • निर्देशन प्रदान करने की प्रमुख विधियां है – व्‍यक्तिगत एवं सामूहिक विधियां
  • एक छात्र निर्देशनकर्ता से विभिन्‍न प्रकार के व्‍यवसायों के चुनाव में जानकारी प्राप्‍त करता है तो निर्देशनकर्ता द्वारा प्रयोग किया जाएगा – व्‍यक्तिगत निर्देशन
  • सिनेमा या चित्रपट के माध्‍यम से या दूरदर्शन के माध्‍यम से सूचनाप्रदान करने की विधि को माना जाएगा – सामूहिक निर्देशन विधि
  • निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य सामूहिक निर्देशन की विधियों से सम्‍बन्धित है – अनुवर्ती कार्यक्रम
  • निर्देशन प्रक्रिया का क्षेत्र होता है – व्‍यापक
  • बेवस्‍टर शब्‍दकोश के अनुसार, परामर्श है पूछताछ, पार‍स्‍परिक तर्क-वितर्क
  • बरनॉर्ड एवं फुलमर के अनुसार, परामर्श है व्‍यक्ति को समझना, व्‍यक्ति के साथ कार्य करना।
  • परामर्श को निर्देशन की एक विधि के रूप में जाना जाता है। इस कथन को स्‍वीकार किया है – जोन्‍स ने
  • रॉबिन्‍सन के अनुसार, परामर्श है दो व्‍यक्तियों का सम्‍पर्क
  • परामर्श दो व्‍यक्तियों का सम्‍पर्क है जिसमें एक को किसी प्रकार की सहायता दी जाती है।यह कथन है मायर्स का
  • रोजर्स के अनुसार, पूर्ण मनोवैज्ञानिक परामर्श है अनिर्देशात्‍मक
  • स्‍वतन्‍त्र वातावरण का अभाव किस प्रकार के परापर्श में होता है – निर्देशात्‍मक परामर्श में
  • अनिर्देशात्‍मक परामर्श में महत्‍व प्रदान किया जाता है – अधिगम में
  • निर्देशात्‍मक परामर्श में महत्‍व प्रदान किया जाता है – व्‍यक्ति को
  • विश्‍लेषण की प्रक्रिया को महत्‍व प्रदान किया जाता है – निर्देशात्‍मक परामर्श में
  • परामर्शदाता अधिक सक्रिय रहता है – निर्देशात्‍मक परामर्श में
  • परामर्श प्रार्थी को क्रियाशील रखने के लिए आवश्‍यक होता है – अनिर्देशात्‍मक परामर्श में
  • अनिर्देशात्‍मक परामर्श को पूर्व नियोजित क्रिया किस विद्वान द्वारा समझा जाता है – जेम्‍स एम. ली. द्वारा
  • डम्‍बाइल के अनुसार, अवधान का आशय है किसी एक वस्‍तु पर अन्‍य वस्‍तुओं की अपेक्षा अधिक चेतना केन्द्रित करना।
  • मैक्‍डूगल के अनुसार, ध्‍यान है ज्ञान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली इच्‍छा, ज्ञान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला प्रयास
  • मन के अनुसार, अवधान है मानसिक क्रिया
  • वैलेन्‍टाइल के अनुसार, अवधान है पूर्ण मानसिक क्रिया
  • स्‍टाउट के अनुसार, पूर्ण ज्ञान का सम्‍बन्‍ध है पूर्व ज्ञान से
  • कक्षा शिक्षण में बालक की मुख मुद्रा से पता लगाया जा सकता है – अवधान की दशा का
  • अवधान की प्रक्रिया में बालक को करना पड़ता है – शारीरिक प्रयास व मा‍नसिक प्रयास
  • अवधान के मूल में समाहित होता है – प्रयोजन, रुचि, उपयोगिता
  • अवधान के लिए आवश्‍यक एवं प्रमुख शर्त है – मानसिक सक्रियता
  • वुडवर्थ के लिए अवधान केन्द्रित करने के लिए प्रमुख आवश्‍यकता है – तत्‍परता




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