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Monday, October 8, 2018

बाल विकाश और शिक्षाशास्त्र भाग-3 व्यक्तित्व एवं समायोजन ( Personality and Adjustment ) के प्रश्न उत्तर पढ़ने के लिए यह क्लीक करे

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Personality and Adjustment 


नमस्कार दोस्तों
आपकी Paper ki taiyari   ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/ ) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-3 व्यक्तित्व एवं समायोजन ( Personality and Adjustment पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये 
                                                     भाग-3 


  1. ली थॉप की रुचि तालिका कितने क्षेत्रों में पर आधारित है – 6
  2. हेपनर की व्‍यावसायिक रुचि सूची में उपलब्‍ध पद है – 167
  3. एस. पी. कुलश्रेष्‍ठ व्‍यावसायिक एवं शैक्षिक प्रपत्र में शैक्षिक क्षेत्रों की संख्‍या है – 7
  4. एस. पी. कुलश्रेष्‍ठ की रुचि तालिका का सम्‍बन्‍ध है व्‍यवसाय से, शैक्षिक क्षेत्र से
  5. स्‍टीवार्ड एण्‍ड ब्रेनार्ड की विशिष्‍ट रुचि तालिका में प्रतिरूपों की संख्‍या है – 7
  6. मूल्‍यांकन एक प्रक्रिया है व्‍यापक
  7. किसी वस्‍तु का निर्धारण ही मूल्‍यांकन है। यह कथन है टारगर्सन का व एडम्‍स का
  8. क्विलिन एवं हनन के अनुसार, मूल्‍यांकन है शिक्षालय द्वारा छात्रों में किए गए परिवर्तनों का प्रमाणीकरण एवं व्‍यवस्‍था
  9. ली के अनुसार, मूल्‍यांकन है शैक्षिक लक्ष्‍यों की प्राप्ति की प्रगति की जांच करना
  10. मूल्‍यांकन को शिक्षा के प्रति नवीन धारणा किसी विद्वान ने माना है क्विलिन ने
  11. क्रोंनबैक के अनुसार, मूल्‍यांकन है शिक्षण लक्ष्‍यों की प्राप्ति की जांच
  12. मूल्‍यांकन के सापेक्षिक रूप से नवीन प्राविधिक पद माना है जे. डब्‍ल्‍यू. राइट स्‍टोन ने
  13. शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में छात्रों की रुचि विभाजिक करने के लिए शिक्षकों को ध्‍यान देना चाहिए छात्र की मनोदशा, छात्र का स्‍वास्‍थ्‍य, छात्र की आवश्‍यकताएं
  14. छात्रों की प्रकरण में रुचि विकसित करने के लिए शिक्षक द्वारा स्‍पष्‍ट करना चाहिए प्रकरण का उद्देश्‍य, उपयोगिता, भविष्‍य में आवश्‍यकताएं
  15. एक बालक का जन्‍म गरीब परिवार में होने के कारण शिक्षा के प्रति उसकी रुचि विकसित न होने का कारण होगा अभिभावक की आर्थिक दशा, अभिभावक की अशिक्षा
  16. बालक की किसी विषय या क्रिया में रुचि होने के लिए आवश्‍यक होता है आनन्‍द
  17. विद्यालय में रुचिपूर्ण वातावरण उत्‍पन्‍न करने में बाधा उपस्थित करते हैं कठोर अनुशासन
  18. अभिभावकों का आक्रामक व्‍यवहार बालक की रुचि पर प्रभाव डालता है रुचि को निम्‍न करना, विपरीत प्रभाव डालना।
  19. रुचियों का विकास होता है जीवन पर्यन्‍त
  20. रुचि तालिका का निर्माण कार्य किस संस्‍था ने प्रारम्‍भ किया कारनेज इन्‍स्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी ने
  21. रुचि तालिका निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्‍भ हुई सन् 1919 में
  22. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में पदों की संख्‍या है – 420
  23. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में प्रतिरूपों की संख्‍या है चार
  24. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में A प्रतिरूप है पुरुषों के लिए
  25. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूचीमें बालिकाओं के लिए प्रतिरूप है प्रतिरूप डब्‍ल्‍यू. बी.
  26. स्‍ट्रांग की व्‍यावसायिक रुचि परिसूची में बालकों के लिए प्रतिरूप है प्रतिरूप ए
  27. मूल्‍यांकन एक प्रक्रिया है व्‍यापक, निरन्‍तर चलने वाली
  28. मूल्‍यांकन स्‍वरूप होता है निदानात्‍मक, सुधारात्‍मक, समास्‍याओं का समाधान करने वाला
  29. मूल्‍यांकन की प्रमुख भूमिका होती है योजना निर्माण में एवं भविष्‍यवाणी में
  30. मूल्‍यांकन की प्रशासनिक आवश्‍यकता होती है संचित अभिलेख पत्र निर्माण में, योजना निर्माण में, त्रुटि सुधार में
  31. मूल्‍यांकन की शैक्षिक आवश्‍यकता होती है पाठ्यक्रम निर्माण में, योग्‍यतानुसार वर्ग निर्माण में, शैक्षिक कठिनाईयों के समाधान में
  32. अध्‍यापककी शिक्षण कुशलता एवं सफलता की जांच के लिए प्रमुख रूप से आवश्‍यक है मापन की, मूल्‍यांकन की
  33. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य शैक्षिक मूल्‍यांकन से सम्‍बन्धित है ज्ञान, बोध, सूचना
  34. किसके आधार पर छात्रों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन सम्‍भव है मूल्‍यांकन
  35. मूल्‍यांकन की प्रक्रिया में समय लगता है अधिक
  36. मूल्‍यांकन का स्‍वरूप होता है मात्रात्‍मक, गुणात्‍मक
  37. मूल्‍यांकन के आधार पर छात्र के सम्‍बन्‍ध में ज्ञान प्राप्‍त किया जा सकता है भविष्‍य एवं वर्तमान का
  38. दक्षता धारित मूल्‍यांकन का क्षेत्र व्‍यापक मूल्‍यांकन की तुलना में है कम
  39. निम्‍नलिखित में किस तथ्‍य का मूल्‍यांकन व्‍यापक मूल्‍यांकन में किया जाता है व्‍यक्तिगत एवं सामाजिक गुण, अभिरुचियां एवं अभिवृत्तियां, पाठ्यक्रम सम्‍बन्‍धी क्रिया एवं स्‍थास्‍थ्‍य विवरण
  40. निम्‍नलिखित में कौन-सा मूल्‍यांकन सतत् मूल्‍यांकन का अंग है दैनिक मूल्‍यांकन, साप्‍ताहिक मूल्‍यांकन, मासिक मूल्‍यांकन
  41. मूल्‍यांकन के प्रमुख पक्ष है तीन
  42. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य मूल्‍यांकन के प्रमुख पक्षों से सम्‍बन्धित है भावात्‍मक, संज्ञानात्‍मक, कौशलात्‍मक
  43. मूल्‍यांकन के संज्ञानात्‍मक पक्ष में मूल्‍यांकन किया जाता है ज्ञान व बोध का
  44. प्रधान रुचियां एवं मान्‍यताएं सम्‍बन्धित है भावात्‍मक पक्ष से
  45. मूल्‍यांकन के भावात्‍मक पक्ष से सम्‍बन्धित है प्रधान रुचियां, व्‍यवस्‍थापन, चरित्रीकरण
  46. यान्त्रिक कुशलताएं मूल्‍यांकन के किस पक्ष से सम्‍बन्धित है कौशलात्‍मक पक्ष से
  47. निम्‍नलिखितमेंकौन-सा तथ्‍य कौशलात्‍मक पक्ष से सम्‍बन्धित है यान्त्रिक कुशलता
  48. बैस्‍ले के अनुसार, मापन है मूल्‍यांकन का उपभाग, मूल्‍यांकन की तरह व्‍यापक
  49. एस. एस. स्‍टीवेन्‍सन के अनुसार, मूल्‍यांकन है संख्‍यात्‍मक ज्ञान
  50. मापन का क्षेत्र है सीमित
  51. मापन किया जा सकता है मात्रात्‍मक रूप में
  52. तुलनात्‍मक अध्‍ययन किसके द्वारा सम्‍भव नहीं है मापन के द्वारा
  53. मापन में समय लगता है कम
  54. मापन होता है निश्चित
  55. मापन में किसी वस्‍तु के पक्ष पर बल दिया जाता है एक पक्ष पर
  56. मापन के क्षेत्र परीक्षण की तुलना में होता है सीमित व संकुचित
  57. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान को व्‍यवस्थित खोज की प्रक्रिया किस विद्वान ने माना है मेकग्रेथी ने
  58. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में किस सन् से माना जाता है सन् 1926 से
  59. बर्किंघम ने अपनी किस पुस्‍तक में क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का वर्णन किया है रिसर्च फॉर टीयर्स
  60. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान की उत्‍पत्ति का प्रमुख सिद्धान्‍त है आधुनिक मानव व्‍यवस्‍था का सिद्धान्‍त
  61. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का प्रयोग एक शिक्षक द्वारा किया जा सकता है छात्रों की शैक्षिक समस्‍याओं के समाधान में
  62. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में प्रमुख भूमिका होती है शिक्षक तथा छात्र की
  63. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का उपयोग किया जा सकता है प्रभावी गृह कार्य के लिए, वर्तनी सम्‍बन्‍धी शुद्धता के लिए, कक्षा शिक्षण में गुणवत्‍तापूर्ण सुधार के लिए
  64. हार्लोडएच. एण्‍डरसन के अनुसार, क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान के सोपानों की संख्‍या है सात
  65. एक कक्षा में शिक्षक द्वारा सर्वप्रथम विचार किया जाता है कि कक्षा में छात्र विलम्‍ब से क्‍यों आते हैं? इस क्रिया में शिक्षक अनुकरण करता है प्रथम सोपान का
  66. अनुसन्‍धान प्रस्‍ताव क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का कारण है द्वितीय
  67. हार्लोड एच. एण्‍डरसन ने अपनी पुस्‍तक क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान के ऊपर लिखी थी, उसका नाम है एन इन्‍ट्रो लोकेशन टु प्रोजेक्टिव टेक्‍नीक
  68. अनुसन्‍धान प्रस्‍ताव में शिक्षक द्वारा ध्‍यान दिया जाता है क्रियान्‍वयन तथा उद्देश्‍यों पर
  69. शिक्षक द्वारा परिकल्‍पनाओं के निर्माण में परिकल्‍पनाओंकी संख्‍या होती है अनिश्चित
  70. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान के प्रारूप के अन्‍तर्गत निश्‍चय किया जाता है उपकरण एवं न्‍यादर्श का, प्रक्रिया का, समय एवं धन का
  71. एन. सी. ई. आर. टी. की प्रायोगिक शोध योजना में सोपानों की संख्‍या है तेरह
  72. निम्‍नलिखित में कौन सा तथ्‍य समस्‍या विश्‍लेषण से सम्‍बन्धित है कारण, साक्षी, अनुसंधानकर्ता
  73. एक शिक्षक क्षरा स्‍तरीय शिक्षण व्‍यवस्‍था के लिए समूह निर्धारण किया जाए तो प्रमुख रूप से आवश्‍यकता होगी मूल्‍यांकन की
  74. शोध कार्य में मूल्‍यांकन की आवश्‍यकता होती है परकिल्‍पनाओं के मूल्‍यांकन के लिए
  75. छात्रों के लिए मूल्‍यांकन की आवश्‍यकता होती है शैक्षिक प्रगति का मूल्‍यांकन के लिए, छात्रों की स्थिति के लिए, शैक्षिक समस्‍याओं के समाधान के लिए
  76. अभिभावकों को मूल्‍यांकन की आवश्‍यकता होती है बालकों की योग्‍यता एवं रुचि के ज्ञान के लिए, बालक की त्रुटियों को दूर करने के लिए, उचित व्‍यवहार को सिखाने के लिए
  77. सामाजिक दृष्टिकोण से मूल्‍यांकन की आवश्‍यकता होती है शिक्षा के उद्देश्‍यों की प्राप्ति के लिए, सामाजिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए
  78. ई. वी. विण्‍डले के अनुसार, मूल्‍यांकन का महत्‍व है शिक्षा नीति में परिवर्तन के लिए, शिक्षा की नवीन योजनाओं के निर्माण के लिए
  79. माध्‍यमिक शिक्षा आयोग के अनुसार,मूल्‍यांकन का महत्‍व है सामाजिक दोष के लिए, विद्यालय के सफल संचालन के लिए, अपेक्षित अधिगम स्‍तर के लिए
  80. कोठारी आयोग के अनुसार,मूल्‍यांकन है एक क्रमिक प्रक्रिया, शिक्षा प्रणाली का आवश्‍यक अंग, शिक्षा के उद्देश्‍यों से घनिष्‍ठ सम्‍बन्‍ध
  81. ग्रीन के अनुसार, मूल्‍यांकन का प्रयोग किया जाता है विद्यालय कार्यक्रम की जांच के लिए, शैक्षिक सामग्री के जांच के लिए, पाठ्यक्रम तथा शिक्षक की जांच के लिए
  82. मूल्‍यांकन का प्रमुख उद्देश्‍य है सर्वांगीण विकास
  83. बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र व से संबंधित सभी Notes  PDF यहां से Download करें
  84. समय-समय पर पाठ्यक्रम में परिवर्तन के लिए प्रमुख रूप से आवश्‍यकता होती है मूल्‍यांकन की का नियन्‍त्रण
  85. निम्‍नलिखित समस्‍या विश्‍लेषण में अनुसन्‍धानकर्ता के नियन्‍त्रण सम्‍बन्‍धी सोपान में कौन-सी समस्‍या अनुसन्‍धानकर्ता के नियन्‍त्रण से है अध्‍ययन के समय विभिन्‍न शब्‍दों की वर्तनी पर ध्‍यान न देना, गृहकार्य को सही रूप में न करना, छात्रों में शुद्ध ज्ञान एवं व्‍यावहारिक ज्ञान में अभाव का पाया जाना।
  86. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान के लिए सर्वप्रथम आवश्‍यकता है समस्‍या के स्‍पष्‍ट एवं वास्‍तविक स्‍वरूप की
  87. परिकल्‍पानाओं के निर्माण में शिक्षण को सर्वप्रथम उन तथ्‍यों पर ध्‍यान देना चाहिए जो कि शिक्षक नियन्‍त्रण में होते हैं प्रत्‍यक्ष रूप से
  88. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का उद्देश्‍य सम्‍बन्धित होता है कक्षा शिक्षण की कार्य पद्धति में सुधार
  89. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान के अन्‍तर्गत समस्‍या का स्‍वरूप होता है सीमित
  90. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में अनुसन्‍धानकर्ता को आवश्‍यकता होती है सामान्‍य प्रशिक्षण की
  91. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में मूल्‍यांकन किया जाता है शिक्षक द्वारा
  92. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में आवश्‍यकता नहीं होती है सामान्‍यीकरण की
  93. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का क्षेत्र होता है कक्षा तथा विद्यालय
  94. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में अनुसन्‍धानकर्ता होते हैं शिक्षक, निरीक्षक, प्रशासक
  95. किस अनुसन्‍धान में अनुसन्‍धानकर्ता का समस्‍या से प्रत्‍यक्ष सम्‍बन्‍ध होता है क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में
  96. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान का प्रमुख उद्देश्‍य है कक्षा शिक्षण की कार्य पद्धति में सुधार
  97. किस अनुसन्‍धान में समस्‍या का क्षेत्र संकुचित होता है क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में
  98. किस अनुसन्‍धान में समस्‍या का स्‍वरूप व्‍यावहारिक होता है क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में
  99. किस अनुसन्‍धान में अनुसन्‍धानकर्ता को विशेष प्रशिक्षण की आवश्‍यकता नहीं होती है क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में
  100. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में परिकल्‍पनाओं का विश्‍लेषण आधारित होता है कारण विश्‍लेषण पर तथा निरीक्षण पर
  101. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में समंक संकलन में सर्वाधिक प्रयोग होता है निरीक्षण विधि का
  102. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में न्‍यादर्श लिया जाता है कक्षा कक्ष से
  103. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान में संसाधनों का एकत्रीकरण किया जाता है शिक्षक द्वारा
  104. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान स्‍वरूप है शिक्षक द्वारा
  105. उपचारात्‍मक शिक्षण में बालक में प्रमुख रूप से जाग्रत करना आवश्‍यक होता है विश्‍वास
  106. व्‍यक्तिगत उपचारात्‍मक शिक्षण सम्‍भव हो सकता है जहां छात्र संख्‍या होती है कम
  107. विशेष कक्षाओं का आयोजन स्‍वरूप है उपचारात्‍मक शिक्षण का
  108. निम्‍नलिखित में कौन-से कार्य उपचारात्‍मक शिक्षण से सम्‍बन्धित हो सकते हैं विशेष कक्षाओं का आयोजन, अतिरिक्‍त गृहकार्य, अतिरिक्‍त कक्षा कार्य
  109. मन्‍द बुद्धि बालकों के लिए उपचारात्‍मक शिक्षण का उद्देश्‍य होना चाहिए स्‍वस्‍थ आदतों का निर्माण, शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य की उन्‍नति
  110. स्किनर के अनुसार, मन्‍द्र बुद्धि बालकों के लिए पाठ्यक्रम की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए शारीरिक एवं मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर आधारित
  111. फ्रेण्‍डसन के अनुसार, मन्‍द बुद्धि बालकों को आवश्‍यकता होती है व्‍यक्तिगत उपचारात्‍मक शिक्षण की
  112. मन्‍द बुद्धिबालकों को उपचारात्‍मक शिक्षा प्रदान करते समय कक्षा में छात्रों की संख्‍या लगभग होनी चाहिए (फ्रैण्‍डसन के अनुसार) – 12 से 15
  113. क्रो एण्‍ड क्रो ने उपचारात्‍मक शिक्षण में शिक्षक की भूमिका को स्‍वीकार किया है परामर्शदाता के रूप में
  114. उपचारात्‍मक शिक्षण की अवधारणा का उदय माना जाता है आधुनिक
  115. उपचारात्‍मक शिक्षण में छात्रों में प्रमुख रूप से विकसित करना चाहिए आत्‍मविश्‍वास
  116. उपचारात्‍मक शिक्षण में सम्‍प्रेषण का महत्‍व माना जाता है छात्रों द्वारा समस्‍या के प्रस्‍तुतीकरण के लिए, प्रमापी शिक्षण अधिगम के लिए
  117. उपचारात्‍मक शिक्षण में बालकों की त्रुटियों एवं स्थितियों के ज्ञान के लिए किए जाने वाले परीक्षणों में नि‍हित होनी चाहिए विश्‍वसनीयता, वैधता, प्रामाणिकता
  118. हिन्‍दी विषय में उपचारात्‍मक शिक्षण में उच्‍चारण में सुधार के लिए प्रयोग करना चाहिए अभ्‍यास एवं पुनरावृत्ति
  119. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य उपचारात्‍मक शिक्षण को प्रभावी बनाने से सम्‍बन्धित है सम्‍प्रेषण, पृष्‍ठ पोषण, तकनीकी का प्रयोग
  120. सांख्यिाकी शब्‍द की उत्‍पत्ति मानी जाती है लैटिन तथा जर्मन भाषा दोनों से
  121. लैटिन भाषा के शब्‍द Status का अर्थ है राज्‍य एवं सरकार
  122. अनुसन्‍धान कार्यों में सहायता देने वाली संस्‍था है एन. एस. ई. आर. टी. एवं एस. सी. ई. आर. टी.
  123. क्रियात्‍मक अनुसन्‍धान स्‍वरूप है मौलिक, ऐतिहासिक या प्रयोगात्‍मक अनुसंधान में से कोई नहीं
  124. क्‍लार्क एवं स्‍टार के अनुसार, उपराचारात्‍मक शिक्षण है विशेष शिक्षा
  125. उपचारात्‍मक शिक्षण की आवश्‍यकता होती है बालकों द्वारा निर्धारित लक्ष्‍य न प्राप्‍त करने की स्थिति में, किसी विषय में पिछड़ जाने की स्थिति में
  126. ब्‍लेयर एवं जोन्‍स के अनुसार, उपचारात्‍मक शिक्षण करता है सतर्कता पूर्ण निदान
  127. उपचारात्‍मक शिक्षण को सर्वोत्‍तम शिक्षण किस विद्वान ने माना है ब्‍लेयर एवं जोन्‍स ने
  128. उपचारात्‍मक शिक्षण की व्‍यवस्‍था की जाती है औपचारिक रूप से
  129. उपचारात्‍मक शिक्षण आधारित है निदानात्‍मक विधियों पर
  130. उपचारात्‍मक शिक्षण में किया जाता है छात्रों की त्रुटियों का निदान, छात्रों की शैक्षिक समस्‍याओं का निदान
  131. उपचारात्‍मक शिक्षण का प्रमुख उद्देश्‍य है अधिगम प्रक्रिया के तनाव एवं संघर्ष को समाप्‍त करना।
  132. उपचारात्‍मक शिक्षण का प्रमुख कार्य है अधिगम सम्‍बन्‍धी समस्‍याओं की खोज, अधिगम सम्‍बन्‍धी समस्‍याओं का निराकरण
  133. उपचारात्‍मक शिक्षण की आवश्‍यकता होती है कमजोर एवं मन्‍द बुद्धि छात्रों के लिए
  134. उपचारात्‍मक शिक्षण की आवश्‍यकता सामान्‍यत: किस विषय में होती है गणित, विज्ञान तथा अंग्रेजी में
  135. उपचारात्‍मक शिक्षण में शिक्षक को होना चाहिए सकारात्‍मक एवं आत्‍मीय
  136. उपचारात्‍मक शिक्षण का प्रमुख उद्देश्‍य होता है दोषपूर्ण आदतों का उत्‍तम आदतों में परिवर्तन
  137. उपचारात्‍मक शिक्षण में कक्षा-कक्ष का वातावरण होना चाहिए रुचिपूर्ण, शान्तिपूर्ण, शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के अनुकूल
  138. उपचारात्‍मक शिक्षणकी अवधि सामान्‍य रूप से होनी चाहिए – 40 मिनट
  139. जर्मन भाषा के शब्‍द Statistics का अर्थ है राज्‍य एवं सरकार
  140. सांख्यिकी का प्रयोग सम्‍भव है अर्थशास्‍त्र, भौतिक शास्‍त्र एवं मनोविज्ञान में
  141. वर्तमान में सांख्यिकी का कार्यक्षेत्र है व्‍यापक
  142. लौविट के अनुसर, सांख्यिाकी का कार्य है आंकिक तथ्‍यों का सारणीकरण एवं वर्गीकरण, घटनाओं की व्‍याख्‍या एवं वर्णन, परस्‍पर तुलनात्‍मक अध्‍ययन
  143. मध्‍यमान एक लब्धि है जो समूह के पदों की संख्‍या से विभाजित करने पर प्राप्‍त होती है। यह कथन है सिम्‍पसन का एवं काफ्का
  144. गैरिट ने मध्‍यमान को माना है प्राप्‍तांकों के योग को उसकी संख्‍या से विभाजित करने पर प्राप्‍त मूल्‍य
  145. 14, 20, 18, 27, 21 का मध्‍यमान होगा – 20
  146. मध्‍यमान के मूल्‍य में निहित होती है वस्‍तुनिष्‍ठता, विश्‍वसनीयता, बैधता
  147. मध्‍यमान के सभी प्राप्‍तांकों के विचलन का योग होता है शून्‍य
  148. मध्‍यमान से किए गए विचलनों के वर्गों का योग किसी अन्‍य मूल्‍य से लिए गए विचलनों के योग से होता है कम
  149. मध्‍यमान का मापन किस दशा में सम्‍भव नहीं होता है किसी एक मापन के उपलब्‍ध न होने पर, दो मापनों के उपलब्‍ध न होने पर, तीन मापनों के उपलब्‍ध न होने पर
  150. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य मध्‍यमान के दोषों से सम्‍बन्धित है अंकों के पूर्ण विवरण के उपलब्‍ध न होने पर मध्‍यमान की गणना सम्‍भव न होना।
  151. जब सर्वाधिक स्थिर एवं विश्‍वसनीय मूल्‍य की गणना करनी हो तो प्रयोग करना चाहिए मध्‍यमान का
  152. बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र व से संबंधित सभी Notes  PDF यहां से Download करें
  153. मध्‍यमान ज्ञात करने की विधि होती है दो
  154. समान्‍तर माध्‍य ज्ञात करने का सूत्र है
  155. मध्‍यांक मान श्रेणी में मध्‍य बिन्‍दु है।यह परिभाषा है गैरिट की
  156. मध्‍यांक मूल्‍य रहता है निश्चित
  157. मध्‍यांक का प्रमुख दोष है बीजगणितीय विवेचन का न होना, श्रृंखला में प्रतिनिधित्‍व न होना, संख्‍यात्‍मक मूल्‍यों को क्रम में व्‍यवस्थित करना।
  158. मध्‍यांक ज्ञात करने के लिए प्रथम सोपान है श्रेणी को व्‍यवस्थित करना, श्रेणी को आरोही या अवरोही क्रम में रखना।
  159. N की स्थिति सम संख्‍या में हो तो मध्‍यांक ज्ञात मध्‍यांक ज्ञात करने का सूत्र होगा
  160. जब N का मान विषय संख्‍या में हो तो मध्‍यांक ज्ञात करने का सूत्र होगा
  161. बहुलांक शब्‍द की उत्‍पत्ति हुई फ्रेंच भाषा से
  162. सांख्यिकी को अनुसन्‍धान का उपकरण किस विद्वान ने माना है टाटे ने
  163. निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य सांख्यिकी से सम्‍बन्धित है आंकड़े, विश्‍लेषण एवं संश्‍लेषण, सारणीयन एवं वर्गीकरण
  164. सांख्यिकी का प्रमुख लाभ है आंकड़ों का सरलीकरण, तुलनात्‍मक अध्‍ययन, परीक्षणों का निर्माण
  165. सांख्यिकी का व्‍यापक प्रयोग होता है अनुसन्‍धान में
  166. सांख्यिकी का प्रयोग नहींकिया जा सकता है इकाई के अध्‍ययन में
  167. सांख्यिकी के द्वारा प्रस्‍तुत नहीं किया जा सकता है समस्‍या का समाधान
  168. सांख्यिकी के निष्‍कर्ष होते हैं शुद्धता वैधता एवं विश्‍वसनीयता के निकट
  169. अयोग्‍य व्‍यक्तियों के हाथ में सांख्यिकीय रीतियां अत्‍यन्‍त खतरनाक औजार हैं। यह कथन है यूल का एवं कैण्‍डाल का
  170. एल हेन्‍स के अनुसार, के‍न्‍द्रीय प्रवृत्ति की आवश्‍यकता होती है प्रदत्‍तों की जटिलता कम करने के लिए, तुलनात्‍मक अध्‍ययन के लिए
  171. Le Mode शब्‍द है फ्रेंच भाषा का
  172. Le Mode का अर्थ है सर्वाधिक फैशन में
  173. बहुलांक वह मापन या प्राप्‍तांक है जो घटित होता है। यह परिभाषा है गैरिट की
  174. 18, 20, 21, 22, 20 में बहुलांक है – 20
  175. बहुलांक का प्रमुख दोष है वर्णन द्वारा व बिना गणना के
  176. बहुलांक का प्रमुख दोष है बीजगणितीय विवेचन का अभाव
  177. बहुलक ज्ञात करेन का सूत्र है
  178. बहुलांक का प्रयोग करना चाहिए शीघ्रता से केन्‍द्रीय प्रवृत्ति की गणना में
  179. गिलफोर्ड के अनुसर, केन्‍द्रीय मूल्‍य को प्रकट करने वाले अंक है औसत
  180. केन्‍द्रीय प्रवृत्ति को एक विशेष मापन एवं एक विशेष मूल्‍य किस विद्वान ने माना है सिम्‍पसन एवं काफ्का ने
  181. केन्‍द्रीय प्रवृत्ति का मापन एक ऐसा मूल्‍य है जो प्रति‍निधित्‍व करता है सम्‍पूर्ण श्रृंखला
  182. केन्‍द्रीय प्रवृत्ति के प्रमुख मापक है तीन
  183. निम्‍नलिखित में कौ-सा तथ्‍य केन्‍द्रीय प्रवृत्ति के मापन से सम्‍बन्धित है मध्‍यमान, मध्‍यांक, बहुलांक


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