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| Individual Differences and Special Child |
नमस्कार दोस्तों ,
आपकी Paper ki taiyari ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/
) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं
शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-11 व्यक्तिगत
विभिन्नताऐं एवं विशिष्ट बालक (Individual Differences and Special Child) पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है
आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की
पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस
विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह
आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये
Ø वैयक्तिक
भिन्नता का प्रमुख आधार है – वंशानुक्रम तथा पर्यावरण
Ø वैयक्तिक
विभिन्नता का कारण है – वंशानुक्रम
Ø निम्नलिखित
कारण व्यक्तिगत भेद के हैं, सिवाय – शिक्षा व्यवस्था
Ø व्यक्तिगत
भेद के कारण है – वंशानुक्रम और वातावरण
Ø व्यक्तिगत
भेद का यह कारण नहीं है – जनसंख्या वृद्धि
Ø ”व्यक्तिगत विभिन्नता में सम्पूर्ण व्यक्तित्व का कोई भी ऐसा पहलू
सम्मिलित हो सकता है, जिसका माप किया जा सकता है।” यह कथन किसका है? – स्किनर का
Ø ”अन्य बालकों की विभिन्नताओं के मुख्य कारणों को प्रेरणा, बुद्धि, परपिक्वता, पर्यावरण
सम्बन्धी उद्दीपन की विभिन्नताओं द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।” यह कथन किसका है – गैरिसन व अन्य का
Ø ”विद्यालय का यह कर्तव्य है कि वह प्रत्येक बालक के लिए उपयुक्त शिक्षा
की व्यवस्था करे, भले ही वह अन्य सब बालकों से कितना ही
भिन्न क्यों न हो।” किसने लिखा है? – क्रो एवं क्रो ने
Ø असामान्य
व्यक्तित्व वाले बालक होते हैं – प्रतिभाशाली
Ø ”भय अनेक बालकों की झूठी बातों का मूल कारण होता है।” यह कथन किस मनोवैज्ञानिक का है – स्ट्रैंग का
Ø प्रतिभाशाली
बालकों की बुद्धिलब्धि होती है – 130 से अधिक
Ø पिछड़े
बालक वे हैं – जो किसी बात को बार-बार समझाने पर भी नहीं
समझते हैं।
Ø प्रतिभाशाली
बालक की विशेषता इनमें से कौन-सी है? – साहसी
जीवन पसन्द करते हैं, खेल में अधिक रुचि लेते है, अमूर्त विषयों में रुचि लेते हैं,
Ø ”शैक्षिक पिछड़ापन अनेक कारणों का परिणाम है। अधिगम में मन्दता उत्पन्न
करने के लिए अनेक कारण एक साथ मिल जाते हैं। यह कथन किसने दिया है – कुप्पूस्वामी ने
Ø ”कोई भी बालक, जिसका व्यवहार सामान्य सामाजिक व्यवहार
से इतना भिन्न हो जाए कि उसे समाज विरोधी कहा जा सके, बाल-अपराधी
है।” यह कथन किसका है – गुड का
Ø बाल-अपराध
के प्रमुख कारण है – आनुवंशिक कारण, शारीरिक कारण, मनोवैज्ञानिक कारण
Ø समस्यात्मक
बालकोंके प्रमुख प्रकारों में किसको सम्मिलित नहीं करेंगे? –
अनुशासन में रहने वाले बालक को
Ø मन्दबुद्धि
बालक की स्किनर के अनुसार कौन-सी विशेषता है? – दूसरों को
मित्र बनाने की अधिक इच्छा, आत्मविश्वास का अभाव, संवेगात्मक और सामाजिक असमायोजन
Ø प्रतिभावान
बालकों की पहचान किस प्रकार की जा सकती है – बुद्धि
परीक्षा द्वारा, अभिरूचि परीक्षण द्वारा, उपलब्धि परीक्षण द्वारा
Ø प्रतिशाली
बालकों की समस्या है – गिरोहों में शामिल होना,
अध्यापन विधियां, स्कूल विषयों और व्यवसायों
के चयन की समस्या
Ø बाल
विकास एवं शिक्षाशास्त्र व से संबंधित सभी Notes व PDF
यहां से Download करें
Ø निम्नलिखित
में समस्यात्मक बालक कौन है – चोरी करने वाले बालक
Ø बालकों
के समस्यात्मक व्यवहार का कारण नहीं है – मनोरंजन की
सुविधा
Ø वंचित
वर्ग के बालकों के अन्तर्गत बालक आते हैं – अन्ध व
अपंग बालक, मन्द-बुद्धि व हकलाने वाले बालक, पूर्ण बधिर या आंशिक बधिर
Ø पिछड़ा
बालक वह है जो – ”अपने अध्ययन के मध्यकाल में अपनी कक्षा
कार्य, जो अपनी आयु के अनुसार एक कक्षा नीचे का है, करने में असमर्थ रहता है।” उक्त कथन है – बर्ट का
Ø ”कुशाग्र अथवा प्रतिभावान बालक वे हैं जो लगातार किसी भी कार्य क्षेत्रमें
अपनी कार्यकुशलता का परिचय देता है।” उक्त कथन है – टरमन का
Ø प्रतिभावान
बालकों में किस अवस्था के लक्षण शीघ्र दिखाई देते हैं – बाल्यावस्था के
Ø प्रतिभाशाली
बालकों की समस्या निम्न में से नहीं है – समाज में
समायोजन
Ø प्रतिभाशाली
बालक होते हैं – जन्मजात
Ø विकलांग
बालकों के अन्तर्गत आते हैं – नेत्रहीन बालक, शारीरिक-विकलांग बालक, गूंगे तथा बहरे बालक
Ø विद्यालय
में बालकों के मानसिक स्वास्थ्य को कौन-सा कारक प्रभावित करता है? –
मित्रता
Ø मानसिक
रूप से पिछड़े बालकों की विशेषता होती है – संवेगात्मक
रूप से अस्थिर, रुचियां सीमित होती है, निरन्तर अवयवस्था का होना।
Ø मानसिक
रूप से पिछड़े बालकों की पहचान निम्न में से कर सकते हैं – बुद्धि परीक्षण, उपलब्धि परीक्षण, मन्द बुद्धि बालकों की विशेषताओं को कसौटी मानकर
Ø ”वह बालक जो व्यवहार के सामाजिक मापदण्ड से विचलित हो जाता है या भटक
जाता है बाल अपराधी कहलाता है।” उक्त कथन है – हीली का
Ø शारीरिक
रूप से विकलांग बालक निम्न में से नहीं होते हैं – स्वस्थ
Ø सृजनशील
बालकों का लक्षण है – जिज्ञासा
Ø मन्द-बुद्धि
बालक की विशेषता नहीं होती है, जो कि – बुद्धि-लब्धि 105 से 110 के
बीच होना।
Ø ”परामर्श का उद्देश्य है छात्र को अपनी विशिष्ट योजनाओं और उचित
दृष्टिकोण का विकास करने के समाधान में सहायता देना।” यह कथन
है – जे. सी. अग्रवाल का
Ø समायोजन
मुख्य रूप से – व्यक्ति की आन्तरिक शकितयों पर निर्भर
होता है, पर्यावरण की अनुकूलता पर निर्भर होता है।
Ø समस्यात्मक
बालक के लक्षण है – विशेष प्रकार की शारीरिक रचना
Ø ”सृजनात्मक नई वस्तु का सृजन करने की योग्यता है। व्यापक अर्थ में,
सृजनात्मक से तात्पर्य, नए विचारों एवं
प्रतिभाओं के योग की कल्पना से है तथा (जब स्वयं प्रेरित हों, देसरे का अनुकरण न करें) विचारों का संश्लेषण हो और जहां मानसिक कार्य
केवल दूसरों के विचार का योग न हो।” उपर्युक्त कथन है –
जेम्स ड्रेवर का
Ø सृजनात्मक
योग्यता वाले बालकों की बुद्धि – प्रखर होती है
Ø प्रतिभावान
बालकों की पहचान किस प्रकार की जा सकती है – बुद्धि
परीक्षा द्वारा, अभिरूचि परीक्षण द्वारा, उपलब्धि परीक्षण द्वारा
Ø प्रतिभाशाली
बालकों की समस्या है – गिरोहों में शामिल होना,
अध्यापन विधियां, स्कूल विषयों और व्यवसायों
के चयन की समस्या
Ø निम्नलिखित
में से विशिष्ट योग्यता की मुख्य विशेषता है – विशिष्ट
योग्यता व्यक्ति में भिन्न-भिन्न मात्रा पाई जाती है, इस
योग्यता को प्रयास द्वारा अर्जित किया जा सकता है।
Ø ”किसी व्यक्ति को कौन-से विषय पढ़ने चाहिए, कौन-से
व्यवसाय करने चाहिए, किस क्षेत्र में उसे अधिक सफलता मिल
सकती है। अभिरुचि निर्देशन करने के लिए अभिरुचियों के मापन की आवश्यकता पड़ती है।
अभिरुचि परीक्षण का मुख्य अभिप्राय मानवीय पदार्थ का उत्तम प्रयोग करना है और
अतिशय को रोकनाहै।” उपर्युक्त कथन है – एन. तिवारी का
Ø अन्धे
बालकों को शिक्षण दिया जाता है – ब्रैल पद्धति द्वारा
Ø निम्नलिखित
में समस्यात्मक बालककौन है – चोरी करने वाले बालक
Ø बालकों
के समस्यात्मक व्यवहार का कारण नहीं है – मनोरंजन की
सुविधा
Ø ब्रोन
फ्रेन बेनर ने समाजमिति विधि किस तथ्य का विवरण एवं मूल्यांकन माना है – सामाजिक स्थिति, सामाजिक ढांचा, सामाजिक चेष्टा
Ø जेविंग्स
के अनुसार समाजमिति विधि है – सामाजिक ढांचे की सरलतम
प्रस्तुति, सामाजिक ढांचे की रेखीय प्रस्तुति
Ø समाजमिति
विधि में तथ्यों के प्रस्तुतीकरण एवं व्यवस्था के लिये प्रयोग की जाने वाली
पद्धति है – समाज चित्र, समाज
सारणी
Ø समाजमिति
विधि के जन्मदाता है – मौरेनो
Ø Who
Shall Sevive पुस्तक के लेखक हैं – मौरेनो
Ø वी.वी.अकोलकर
के अनुसार सामाजिक प्रविधि है – समूह की संरचना की अध्ययन
प्रविधि, समूह का स्तर मापने की प्रविधि
Ø ‘एक बालक प्रतिदिन कक्षा से भाग जाता है।‘ वह बालक है
– पिछड़ा बालक
Ø रेटिंग
एंगल एवं प्रश्नावली किस प्रविधि से सम्बन्धित है – मूल्यांकन विधि से
Ø व्यक्ति
अध्ययन विधि में प्रमुख भूमिका होती है – सूचना की
Ø ”व्यक्ति अध्ययन विधि का मुख्य उद्देश्य किसी कारण का निदान है।”
यह कथन है – क्रो एण्ड क्रो
Ø व्यक्ति
अध्ययन विधि में किस प्रकार की सूचनाओं की आवश्यकता होती है – पारिवारिक, सामाजिक, सामान्य
एवं शारीरिक
Ø प्रतिभाशाली
बालकों की शिक्षण विधि है – गतिवर्द्धन, सम्पन्नीकरण, विशिष्ट कक्षाएं
Ø ”सृजनात्मक से आशय पूर्ण अथवा आंशिक रूप से तीन वस्तु के उत्पादन से है।”
उक्त कथन है – रूसो का
Ø निम्न
में से पलायनशीलता के कारण हैं – कल्पना की अधिकता,
कुसमायोजन, दोषपूर्ण शिक्षण पद्धति
Ø ”बालकों में सृजनाशीलता के विकास हेतु सकारात्मक अभिवृत्ति के निर्माण में
विद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है।” उक्त कथन है – डॉ. एस. एस. चौहान का
Ø विद्यालयों
में तीव्र एवं मन्द-बुद्धि बालकों के लिए निम्न में से शैक्षणिक व्यवस्था होनी
चाहिए –
अवसर की समानता, पाठ्यक्रम में समृद्धि,
अहमन्यता को रोकना
Ø विशिष्ट
बालक में प्रमुख विशेषता है – साधारण बालकों से भिन्न
गुण एवं व्यवहार वाला बालक
Ø प्रतिभाशाली
बालक की विशेषता है – तर्क, स्मृति,
कल्पना, आदि मानसिक तत्वों का विकास। उदार
एवं हॅसमुख प्रवृत्ति के होते है, दूसरों का सम्मान करते
हैं, चिढ़ाते नहीं हैं
Ø विशिष्ट
बालकों की श्रेणी में आते हैं केवल – प्रतिभाशाली
बालक, पिछड़े बालक, समस्यात्मक बालक
Ø शारीरिक
रूप से अक्षम बालकों को किस श्रेणी में रखते हैं – विकलांग
Ø ”प्रतिभाशाली बालक शारीरिक गठन, सामाजिक समायोजन,
व्यक्तित्व के गुणों, विद्यालय उपलब्धि,
खेल की सूचनाओं और रुचियों की विविधता में औसत बालकों से श्रेष्ठ
होते हैं।” यह कथन है – टरमन एवं ओडम
का
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य सांख्यिाकीय विधि से सम्बन्धित है – संकलन, वर्गीकरण, विश्लेषण
Ø टरमन
के अनुसार प्रतिभाशाली बालक की बुद्धि-लब्धि कितने से अधिक होती है –
140
Ø ”जो बालक कक्षा में विशेष योग्यता रखते हैं उनको प्रतिभाशाली कहते हैं।”
यह कथन है – क्रो एवं क्रो का
Ø चोरी, झूठ व क्रोध करने वाला बालक है – समस्यात्मक
Ø ”जिस बालक की शैक्षिक लब्धि85 से कम होतीहै उसे
पिछड़ा बालक कहा जा सकता है।” यह कथन है – बर्ट का
Ø ”जिस बालक की बुद्धि-लब्धि 70 से कम होती है उसको मन्द-बुद्धि
बालक कहते हैं।” यह कथन है – क्रो एवं
क्रो का
Ø ”एक व्यक्ति जिसमें कोई इस प्रकार का शारीरिक दोष होता है जो किसी भी रूप
में उसे सामान्य क्रियाओं में भाग लेने से रोकता है या उसे सीमित रखता है,
उसको हम विकलांग कह सकते हैं।” यह कथन है –
क्रो एवं क्रो का
Ø ”प्रतिभाशाली बालक 80 प्रतिशत धैर्य नहीं खोते,
96 प्रतिशत अनुशासित होते हैं तथा 58 प्रतिशत
मित्र बनाने की इच्छा रखते हैं।” यह कथन है – विटी का
Ø ‘Survey
of the Education of Gifted Children’ नामक पुस्तक लिखी है –
हैविंगहर्स्ट ने
Ø ‘The
Causes and Treatment of Backwardness’ नामक पुस्तक लिखी है –
बर्ट ने
Ø प्रतिभाशाली
बच्चों की पहचान की जा सकती है – विधिवत अवलोकन द्वारा,
प्रमापीकृत परीक्षणों द्वारा
Ø समस्यात्मक
बालकों की शिक्षा के समय निम्न बातें ध्यान में रखनी चाहिए – बालकों को मनोरंजन के उचित अवसर दिये जाएं। शिक्षकों का मधुर व सहायोगात्मक
व्यवहार
Ø ‘Introduction
of Psychology’ नामक पुस्तक लिखी है – हिलगार्ड
व अटकिंसन ने
Ø प्रतिभाशाली
बालकों को कहा जाता है – श्रेष्ठ बालक, तीव्र सीखने वाले, निपुण बालक
Ø जिस
सहानुभूति में क्रियाशीलता होती है, वह है –
निष्क्रिय
Ø बालक
को सामाजिक व्यवहार की शिक्षा दी जा सकती है – शारीरिक
गतियों से
Ø दूसरे
व्यक्तियों में संवेग देखकर हम उसका करने लगते है – घृणा
Ø निष्क्रिय
सहानुभूति होती है – मौखिक व कृत्रिम
Ø प्रतिभावान
बालकों की पहचान करने के लिए हमें सबसे अधिक महत्व – वस्तुनिष्ठ परीक्षणों को देना चाहिए।
Ø ”निर्देशन वह सहायता है जो एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को विकल्प
चुनने एवं समायोजन प्राप्त करने तथा समस्या हल करने के लिए दी जाती है।” उक्त कथन है – जोन्स का
Ø ”कक्षा में जो सम्बन्धों के प्रतिमान अथवा समूह परिस्थिति होती है वह
सीखने पर प्रभाव डालती है।” उक्त कथन है – बोवार्ड का
Ø ”कक्षा-शिक्षण में जो सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव हैं; वह
दूसरों के साथ अन्त:क्रिया करना है।” उक्त कथन है –
रिट का
Ø निम्न
में से निर्देशन दिया जा सकता है – अध्यापक को,
डॉक्टरों को छात्रों को
Ø जो
निर्देशन एक व्यक्ति को उसकी व्यावसायिक तथा जीविका में उननति सम्बन्धी समस्याओं
को हल करने के लिए उसकी व्यक्तिगत विशेषताओं को उसके जीविका सम्बन्धी अवसरों के
सम्बन्ध में ध्यान रखते हुए दिया जाता है, वह कहलाता
है – व्यावसायिक निर्देशन
Ø ”प्रभावशाली बालक वे होते हैं जिनका नाड़ी संस्थान श्रेष्ठ होता है।”
उक्त कथन है – सिम्पसन का, तयूकिंग का
Ø ”ऐसे व्यक्ति जिनमें ऐसा शारीरिक दोष होता है जो किसी भी रूप में उसे
साधारण क्रियाओं में भाग लेने से रोकता है या उसे सीमित रखता है, ऐसे व्यक्ति को हम विकलांग व्यक्ति कह सकते हैं।” उक्त
कथन है – क्रो एवं क्रो का
Ø सृजनात्मक
बालक की प्रकृति होती है – सृजनात्मक बालक सदैव सफलता
की ओर उन्मुख रहते हैं।
Ø मन्दगति
से सीखने वाले बालकों की शिक्षा के लिए क्या कदम उठाना चाहिए – आवासीय विद्यालय, विशेष विद्यालय, विशेष कक्षा
Ø ”विशिष्ट बालक वह है जो मानसिक, शारीरिक व सामाजिक
विशेषताओं से युक्त होते हैं”, उक्त कथन है – क्रिक का
Ø बालापराध
का कारण दूषित वातावरण भी होता है। दूषित वातावरण से आशय है – वेश्यालय, शराबखाना, जुआघर
Ø गम्भीर
मन्दितमना वाले बालकों की शिक्षा-लब्धि होती है – 19
से कम
Ø निम्न
में से पिछड़े बालक की समस्या है – स्कूल सम्बन्धी
समस्याएं, संवेगात्मक समस्याएं, सामाजिक
समस्याएं
Ø साधारण
मन्दिमना वाले बालकों की शिक्ष-लब्धि होती है – 51-36
Ø पिछड़े
बालकों को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी करने के लिए क्या करना चाहिए – पिछड़ेपन के कारणों की खोज करना, व्यक्तिगत ध्यान,
पाठान्तर क्रियाओं की व्यवस्था
Ø ”बालकों में सृजनशीलता के विकास हेतु सकारात्मक अभिवृत्ति के निर्माण में
विद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।” उक्त कथन है –
डॉ. एस.एस. चौहान का
Ø ”सृजनात्मक वह कार्य है जिसका परिणाम नवीन हो और जो किसी समय किसी सकूह
द्वारा उपयोगी या सन्तोषजनक रूप में मान्य हों।” यह
परिभाषा किसने प्रतिपादित की – स्टेन ने
Ø ”मानसिक स्वास्थ्य सम्पूर्ण व्यक्तित्व का सामंजस्यपूर्ण कृत्य है।”
यह कथन किस मनोवैज्ञानिक का है – हैडफील्ड का
Ø मानसिक
रूप से पिछड़े बालकों की बुद्धि-लब्धि मानी गई है – 70
से 80 के बीच
Ø शारीरिक
अस्वस्थता, काम प्रवृत्ति का प्रवाह तथा मन्द गति से
विकास बालापराध के किस कारण के अन्तर्गत आते हैं – व्यक्तिगत
कारण
Ø बाल्यावस्था
में बालक दृष्टिकोण अपनाना आरम्भ करता है – यथार्थवादी
दृष्टिकोण
Ø सृजनात्मकता
का अर्थ है – सृजन या रचना सम्बन्धी योग्यता
Ø ”सृजनात्मकता मौलिकपरिणामों को अभिव्यक्त करने की मानसिक प्रक्रिया है।”
यह कथन है – क्रो एवं क्रो का
Ø सृजनात्मकता
की विशेषता कौन-सी नहीं है – केन्द्रानुमुखता
Ø सृजनात्मकता
में किस तत्व का योग नहीं है – बनावटीपन का
Ø किसी
बालक में निहित सृजनशीलता को पता करने के दो प्रकार है – परीक्षण निरीक्षण
Ø ”सृजनात्मकता मुख्यत: नवीन रचना या उत्पादन में होती है।” यह कथन है – ड्रेवर का
Ø सृजनशील
बालक के गुण है – विनोदी प्रवृत्ति, समायोजनशील, सौन्दर्यात्मक विकास
Ø सृजनात्मकता
का तात्पर्य है – यह व्यक्ति में नये-नये
कार्य करने की क्षमता और शक्ति है।
Ø सृजनात्मकता
की है जो व्यक्ति को बनाती है उच्चकोटि का – साहित्यकार
Ø निम्नलिखित
में से कौन-सा सिद्धान्त सृजनात्मकता के बारे में नहीं है – प्रतिष्ठावाद
Ø ‘मानसिक तथा शिक्षा-लब्धि परीक्षण’ नामक पुस्तक
किसने लिखी है – बर्ट ने
Ø बालक
का मानसिक विकास सम्भव नहीं है – प्रेमपूर्ण वातावरण में
Ø किशोर
के मानसिक विकास का मुख्य लक्षण है – मानसिक स्वतन्त्रता
Ø अच्छी
आर्थिक स्थिति वाले बच्चे प्रतिभाशाली होते हैं, कारण
है – उचित भोजन, उपचार के पर्याप्त
साधन, उत्तम शैक्षिक अवसर
Ø बालक
में तर्क और समस्या-समाधान की शक्ति का विकास होता है – बारहवें वर्ष में
Ø ”सहयोग करने वाले में ‘हम की भावना’ का विकास और उनके साथ काम करने की क्षमता का विकास तथा संकल्प समाजीकरण
कहलाता है।” यह कथन है – क्रो व क्रो
का
Ø ”किशोर का चिन्तन बहुधा शक्तिशाली पक्षपातों और पूर्व-निर्णयों से
प्रभावित रहता है।” यह कथन है – एलिस
क्रो का
Ø बालक
की मानिसक योग्यताएं हैं – संवेदना
Ø शारीरिक
परिवर्तन के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है, वह
है – परिपक्वता, अभिवृद्धि, विकास
Ø शिक्षक
को बालकों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए – मनोवैज्ञानिक
पद्धति से
Ø ”एक व्यक्ति लकड़ी से मनचाही कलात्मक वस्तु बना सकता है। चित्रकार
मनचाहे रंगों से चित्र की सजीवता प्रकट कर सकता है, इसी
प्रकार मूर्तिकार एवं वास्तुविद् भी अपनी-अपनी कलाओं की छाप छोड़ते हैं, यह तो सृजनात्मकता है।” उपर्युक्त कथन है –
बिने का
Ø ”अभिरुचियां किसी व्यक्ति को प्रशिक्षण के उपरान्त ज्ञान, दक्षता या प्रतिक्रियाओं को सीखने की योग्यता है।” यह
कथन है – चारेन का
Ø वे
बालक जो सामाजिक, भावनात्मक, बौद्धि, शैक्षिक किसी भी या सभी पक्षों में औसत
बालकों से भिन्न होते हैं तथा सामान्य विद्यालयी कार्यक्रम उनके लिए पर्याप्त
नहीं होते हैं, कहलाते हैं – असामान्य
बालक
Ø व्यक्ति
के मानसिक तनाव को कम करने की प्रत्यक्ष विधि है – बाधा
दूर करना
Ø बाल
अपराध के लिए बुरी संगति को उत्तरदायी किसने माना है – हीली व ब्रोनर ने
Ø पिछड़े
बालकों को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रसर करने के लिए क्या करना चाहिए – घर तथा स्कूल में बालकों के समायोजन में सहायता, विशेष
स्कूलों की व्यवस्था, पाठान्तर क्रियाओं की व्यवस्था
Ø मानसिक
रूप से पिछड़े बालकों की समस्या निम्न में से नहीं है – परिवार में समायोजित होते हैं।
Ø बाल
अपराध को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए – परिवार के
वातावरण में सुधार, स्कूल के वातावरण में सुधार, समाज के वातावरण में सुधार
Ø बालापराध
की वह विधि जिसमें बालक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर सामाजिक वातावरण में
परिवर्तन लाया जाता है, वह है – वातावरणात्मक विधि
Ø ”सृजनात्मकता मुख्यत: नवीन रचना या उत्पादन में होती है।” यह कथन है – ड्यूबी का
Ø गिलफोर्ड
ने सृजनात्मकता के अनेक परीक्षण बताये हैं, जिनमें
प्रमुख है – चित्रपूर्ति परीक्षण, प्रोडक्ट
इम्प्रूवमैन्ट टास्क
Ø टोरेन्स
ने सृजनात्मक व्यक्ति की कितनी व्यक्तित्व विशेषताओं की सूची तैयार की है –
84
Ø ”सृजनात्मकता का एक गुण है जिसमें किसी नवीन तथा इच्छित वस्तु का निर्माण
किया जाता है।” यह कथन है – इन्द्रेकर
का
Ø बालक
के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण है – विद्यालय का
वातावरण, सामाजिक वातावरण, पारिवारिक
वातावरण
Ø ”वह बालक जो अपने अध्ययन के मध्यकाल में अपनी कक्षा का कार्य जो उसकी आयु
के अनुसार सामान्य है, करने में असमर्थ रहता है।” वह कौन-सा बालक है – पिछड़ा बालक
Ø कोई
भी व्यवहार जो सामाजिक नियमों या कानूनों के विरुद्ध बालकों द्वारा किया जाता है, तो वह कहलाता है – बालापराध
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