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Monday, October 8, 2018

बाल विकाश और शिक्षाशास्त्र भाग-8 बाल विकाश का परिचय (Introduction to Child Development ) के प्रश्न उत्तर पढ़ने के लिए यह क्लीक करे

बाल विकाश का परिचय (Introduction to Child Development) pdf ,free pdf download
Paper Ki Taiyari


नमस्कार दोस्तों
आपकी Paper ki taiyari   ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/ ) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-8  बाल विकाश का परिचय (Introduction to Child Development)  पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये 
                                                भाग-8  

Ø पोषण के उपायों में प्रभावशीलता के लिए आवश्‍यक है शिक्षक सहयोग, अभिभावक सहयोग, विद्यार्थी सहयोग
Ø निम्‍नलिखित में कौन-सी विशेषता पोषण से सम्‍बन्धित है सन्‍तुलित भोजन
Ø सन्‍तुलित भोजन के साथ पोषण के लिए आवश्‍यक है स्‍वास्‍थ्‍यप्रद वातावरण, उचित व्‍यायाम, खेलकूद
Ø वह उपाय जो पोषण पर्यावरणीय उपायों से सम्‍बन्धित है पर्याप्‍त निंद्रा, पर्याप्‍त व्‍यायाम, स्‍वास्‍थ्‍यप्रद वातावरण
Ø सन्‍तुलित भोजन की तालिका में मांसाहारी एवं शाकाहारी बालकों की स्थिति होती है समान या असमान दोनों की नहीं।
Ø 1 से 3 वर्ष के बालक के लिए अन्‍न होना चाहिए – 150 ग्राम
Ø 7 से 9 वर्ष के मांसाहारी एवं शाकाहारी बालकों के लिए अन्‍न होना चाहिए – 250 ग्राम
Ø 7 से 9 वर्ष के बाल को किस स्‍वरूप के लिए 75 ग्राम हरी सब्जियों की आवश्‍यकता होती है शाकाहारी एवं मांसाहारी दोंनों के लिए
Ø सन्‍तुलित भोजन की तालिका में 1 से 9 वर्ष के लिए फलों की तालिका में वजन होता है एक समान
Ø सन्‍तुलित भोजन में पोषक तत्‍व होते है प्रोटीन, विटामिन, वसा
Ø प्रोटीन सामान्‍य रूप से होती है दो प्रकार की
Ø मांस से प्राप्‍त प्रोटीन को कहते है जन्‍तु जन्‍य प्रोटीन
Ø कौन-सा स्रोत वनस्‍पतिजन्‍य प्रोटीन का है जौ
Ø क्‍वाशियरकर नामक रोग उत्‍पन्‍न होता है प्रोटीन की कमी से
Ø गन्‍ने के रस, अंगूर तथा खजूर से प्रमुख रूप से प्राप्‍त होती है कार्बोज
Ø कार्बोज की अधिकता से कौन सा रोग उत्‍पन्‍न होता है मोटापा, बदहजमी
Ø वसा के प्रमुख स्रोत हैं वनस्‍पति तेल व सूखे मेवे
Ø शरीर को अधिक शक्ति प्रदान करता है वसा
Ø खनिज लवणों की कमी से रक्‍त को नहीं मिल पाता है हीमोग्‍लोबिन
Ø घेंघा नामक रोग उत्‍पन्‍न होता है आयोडिन अथवा खनिज लवण की कमी से
Ø विटामिन का आविष्‍कार हुआ था उन्‍नीसवीं शताब्‍दी के आरम्‍भ में
Ø विटामिन ए की कमी से बालकों में कौंन-सा रोग होता है रतौंधी
Ø विटामिन बी की कमी से होता है बेरी-बेरी रोग
Ø पेलाग्रा रोग किस विटामिन की कमी से होता है बी
Ø बी काम्‍पलेक्‍स कहा जाता है – B1, B2, B2 को
Ø विटामिन सीकी कमी से कौन-सा रोग होता है स्‍कर्वी
Ø विटामिन सी का प्रमुख स्‍त्रोत है आंवला
Ø स्त्रियों में मृदुलास्थि रोग किस विटामिन की कमी से होता है विटामिन डी
Ø विटामिन डी की कमी से उत्‍पन्‍न होता है सूखा रोग
Ø सूखा रोग पाया जाता है बालिकाओं में
Ø विटामिन ई की कमी से स्त्रियों में सम्‍भावना होती है बांझपन, गर्भपात
Ø विटामिन ई की कमी से उत्‍पन्‍न होने वाला रोग है नपुंसकता
Ø विटामिन K का प्रमुख स्‍त्रोत है केला, गोभी, अण्‍डा
Ø विटामिन केकी सर्वाधिक उपयोगिता होती है गर्भिणी स्‍त्री के लिए, स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए
Ø रक्‍त का थक्‍का न जमने का रोग किस विटामिन के अभाव से उत्‍पन्‍न होता है विटामिन के
Ø जल हमारे शरीर में कितने प्रतिशत है – 70 प्रतिशत
Ø दूषित जल के पीने से उत्‍पन्‍न रोग है पीलिया, डायरिया
Ø कार्य करने के लिए किस पदार्थ की आवश्‍यकता होती है कार्बोज की, कार्बोहाइड्रेट की
Ø अध्यापक को पोषक के ज्ञान की आवश्‍यकता होती है बाल विकास के लिए, छात्रों के रोगों की जानकारी के लिए, अभिभावकों को पोषण का ज्ञान प्रदान कराने के लिए।
Ø अभिभावकों को पोषण का ज्ञान कराने का सर्वोत्‍तम अवसर होता है शिक्षकअभिभावक गोष्‍ठी
Ø पोषण की क्रिया को बाल विकास से सम्‍बद्ध करने के लिए आवश्‍यक है निरन्‍तरता
Ø शारीरिक विकास के लिए निरन्‍तरता के रूप में उपलब्‍ध होना चाहिए सन्‍तुलित भोजन, उचित व्‍यायाम
Ø अनिरन्‍तरता का विकास प्रक्रिया में प्रमुख कारक है साधनों की अनिरन्‍तरता
Ø एक बालक को सन्‍तुलित भोजन की उपलब्‍धता सप्‍ताह में दो दिन होती है। इस अवस्‍था में उस बालक का विकास होगा अनियमित
Ø साधनों की निरन्‍तरता में बालक विकास की गति को बनाती है तीव्र
Ø साधनों की अनिरन्‍तरता बाल विकास को बनाती है मंद
Ø एक बालक में विद्यालय के प्रथम दिन अध्‍यापक एवं विद्यालय के प्रति अरूचि उत्‍पन्‍न हो जाती है तो उसका प्रारम्भिक अनुभव माना जायेगा दोषपूर्ण
Ø सर्वोत्‍तम विकास के लिए प्रारम्भिक अनुभवों का स्‍वरूप होना चाहिए सुखद
Ø एक बालक प्रथम अवसर पर एक विवा‍ह समारोह में जाता है वहां उसको अनेक प्रकार की विसंगतियां दृष्टिगोचर होती हैं तो माना जायेगा कि बालक का सामाजिक विकास होगा मंद गति से
Ø शिक्षण कार्य में बालक के प्रारम्भिक अनुभव को उत्‍तम बनाने का कार्य करने के लिए शिक्षक को प्रयोग करना चाहिए शिक्षण सूत्रों का
Ø परवर्ती अनुभवों का सम्‍बन्‍ध होता है परिणाम से
Ø परवर्ती अनुभव का प्रयोग किया जा सकता है विकासकी परिस्थिति निर्माण में, विकास मार्ग को प्रशस्‍त करने में
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा में प्राथमिक स्‍तर पर सामान्‍यत: किस विधि का प्रयोग उचित माना जायेगा खेल विधि
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा का प्रमुख आधार है बालक का केन्‍द्र मानना
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा में किसकी भूमिका गौण होती है शिक्षक की
Ø बाल केन्‍द्रित शिक्षा में प्रमुख भूमिका होती है बालक की
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा का उद्देश्‍य होता है बालक की रूचियों का ध्‍यान, अन्‍तर्निहित प्रतिभाओं का विकास, गतिविधियों का विकास
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा में शिक्षा प्रदान की जाती है कविताओं एवं कहानियों के रूप में
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा में प्रमुख स्‍थान दिया जाता है गतिविधियों एवं प्रयोगों को
Ø प्रगतिशील शिक्षा का आधार होता है वैज्ञानिकता व तकनीकी
Ø शिक्षा में कम्‍प्‍यूटर का प्रयोग माना जाता है प्रगतिशील शिक्षा
Ø शिक्षा में प्राथमिक स्‍तर पर खेलों का प्रयोग माना जाता है बाल केन्द्रित शिक्षा
Ø बालकों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना उद्देश्‍य है बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा का
Ø शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण यन्‍त्रों का प्रयोग किसकी देन माना जाता है प्रगतिशील शिक्षा की
Ø समाज में अन्‍धविश्‍वास एवं रूढि़वादिता की समाप्ति के लिए आवश्‍यक है प्रगतिशील शिक्षा
Ø शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाना उद्देश्‍य है बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा का
Ø शिक्षण अधिगम सामग्री में प्रोजेक्‍टर, दूरदर्शन एवं वीडियो टेप का प्रयोग करना प्रमुख रूप से सम्‍बन्धित है प्रगतिशील शिक्षा का
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा में एवं प्रगतिशील शिक्षा में पाया जाता है घनिष्‍ठ सम्‍बन्‍ध
Ø विशेष बालकों के लिए उनकी शैक्षिक आवश्‍यकताओं की पूर्ति की जाती हैं बाल केन्द्रित शिक्षा में
Ø पाठ्यक्रम विविधता देन है बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा की
Ø छात्रों के सर्वांगीण विकास का उद्देश्‍य निहित है बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा में
Ø एक विद्यालय में जाति के आधार पर बालकों को उनकी रूचि एवं योग्‍यता के आधार पर शिक्षा प्रदान की जाती है। इस शिक्षा को माना जायेगा बाल केन्द्रित शिक्षा
Ø बालकों को विद्यालय में किसी जाति या धर्म का भेदभाव किए बिना बालकों को उनकी रूचि एवं योग्‍यता के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाती हैं। उनकी इस शिक्षा को माना जायेगा आदर्शवादी शिक्षा
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा है एक-दूसरे की पूरक
Ø बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा के विकास में महत्‍वपूर्ण योगदान है मनोविज्ञान, विज्ञान, व तकनीकी का
Ø एक बालक की लम्‍बाई 3 फुट थी, दो वर्ष बाद उसकी लम्‍बाई 4 फुट हो गयी। बालक की लम्‍बाई में होने वाले परिवर्तन को माना जायेगा वृद्धि एवं विकास
Ø स्किनर के अनुसार वृद्धि एवं विकास का उदेश्‍य है प्रभावशाली व्‍यक्तित्‍व
Ø परिवर्तन की अवधारणा सम्‍बन्धित है वृद्धि एवं विकास से
Ø वृद्धि एवं विकास का ज्ञान एक शिक्षक के लिए क्‍यों आवश्यक हैं सर्वांगीण विकास के लिए
Ø क्रोगमैन के अनुसार वृद्धि का आशय है जैविकीय संयमों के अनुसार वृद्धि
Ø सोरेन्‍सन के अनुसार वृद्धि सूचक है धनात्‍मकता का
Ø सोरेन्‍सन के अनुसार वृद्धि मानी जाती है परिवर्तन का आधार
Ø गैसेल के अनुसार संकुचित दृष्टिकोण है वृद्धि का
Ø गैसेल के अनुसार व्‍यापक दृष्टिकोण है विकास का
Ø निम्‍नलिखित में कौन-सा तथ्‍य गैसेल के विकास के अवलोकन रूपों से सम्‍बन्धित है शरीर रचनात्‍मक, शरीर क्रिया विज्ञानात्‍मक, व्‍यवहारात्‍मक
Ø विकास के अनुरूप व्‍यक्ति में नवीन योग्‍यताएं एवं विशेषताएं प्रकट होती हैयह कथन है श्रीमती हरलॉक का
Ø सोरेन्‍स के अनुसार विकास है परिपक्‍वता एवं कार्य सुधार की प्रक्रिया
Ø अभिवृद्धि वृद्धि की प्रक्रिया चलती है गर्भावस्‍था से लेकर प्रौढ़ावस्‍था तक
Ø अभिवृद्धि में होने वाले परिवर्तन होते है शारीरिक
Ø अभिवृद्धि में होने वाले परिवर्तन होते है मात्रात्‍मक
Ø अभिवृद्धि में होने वाले परिवर्तन होते है रचनात्‍मक
Ø अभिवृद्धि का क्रममानव को ले जाता है वृद्धावस्‍था की ओर
Ø अभिवृद्धि कहलाती है कोशिकीय वृद्धि
Ø अभिवृद्धि एक धारणा है संकीर्ण
Ø अभिवृद्धि का सम्‍बन्‍ध है शारीरिक परिवर्तन से
Ø अभिवृद्धि एक है साधारण प्रक्रिया
Ø अभिवृद्धि की प्रक्रिया सम्‍भव है मापन
Ø विकास की प्रक्रिया चलती है गर्भावस्‍था से बाल्‍यावस्‍था तक
Ø विकास की प्रक्रिया में होने वाले परिवर्तन माने जाते है शारीरिक, मानसिक, सामाजिक
Ø वृद्धिएवं विकास के सन्‍दर्भ में सत्‍य है अभिवृद्धि बाद में होती है व विकास पहले होता है।
Ø विकास की प्रक्रिया में होने वाले परिवर्तन माने जाते है गुणात्‍मक
Ø विकास की प्रक्रिया के परिणाम हो सकते हैं रचनात्‍मक एवं विध्‍वंसात्‍मक
Ø विकास का प्रमुख सम्‍बन्‍ध है परिपक्‍वता से
Ø विकास के क्षेत्र को माना जाता है व्‍यापक प्रक्रिया से
Ø विकास की प्रक्रिया को कठिनाई के आधार पर स्‍वीकार किया जाता है जटिल प्रक्रिया के रूप में
Ø विकास की प्रक्रिया में समावेश होता है वृद्धि एवं परिपक्‍वता का
Ø विकास की प्रक्रिया का सम्‍भव है भविष्‍यवाणी करना
Ø क्रो एण्‍ड क्रो के अनुसार संवेग है मापात्‍मक अनुभव
Ø संवेग पुनर्जागरण की प्रक्रिया है।यह कथन है क्रो एण्‍ड क्रो का
Ø संवेग शरीर की जटिल दशा है।यह कथन है जेम्‍स ड्रेकर का
Ø संवेगों में मानव को अनुभूतियां होती है सुखद व दु:खद
Ø संवेगों की उत्‍पत्ति होती है परिस्थिति एवं मूलप्रवृत्ति के आधार पर
Ø मैक्डूगल के अनुसार संवेग होते हैं चौदह
Ø भारतीय विद्वानों के अनुसार संवेगों के प्रकार है दो
Ø भारतीय विद्वानों के अनुसार संवेग है रागात्‍मक संवेग
Ø सम्‍मान, भक्ति और श्रद्धा सम्‍बन्धित है रागात्‍मक संवेग से
Ø गर्व, अभिमान एवं अधिकार सम्‍बन्धित है द्वेषात्‍मक संवेग से
Ø क्रोध का सम्‍बन्‍ध किस मूल प्रवृत्ति से होता है युयुत्‍सा
Ø निवृत्ति मूल प्रवृत्ति के आधार पर कौन-सा संवेग उत्‍पन्‍न होता है घृणा
Ø आत्‍म अभिमान संवेग किस मूल प्रवृत्ति के कारण उत्‍पन्‍न होता है आत्‍म गौरव
Ø कामुकता की स्थिति के लिए कौन-सी प्रवृत्तिउत्‍तरदायी है काम प्रवृत्ति
Ø सन्‍तान की कामना नाम मूल प्रवृत्ति कौन-सा संवेग उत्‍पन्‍न करती है वात्‍सल्‍य
Ø दीनता मानव में किस संवेग को उत्‍पन्‍न करती है आत्‍महीनता
Ø भोजन की तलाश किस संवेग से सम्‍बन्धित है भूख से
Ø रचना धर्मिता मूल प्रवृत्ति से कौन-सा संवेग विकसित होता है कृतिभाव
Ø मैक्‍डूगल के अनुसार हास्‍य है संवेग एवं मूल प्रवृत्ति
Ø संग्रहणमूल प्रवृत्ति का सम्‍बन्‍ध है अधिकार से
Ø थकान के कारण बालक के व्‍यवहार में कौन-सा संवेग उदय हो सकता है क्रोध
Ø संवेगात्‍मक अस्थिरता पायी जाती है कमजोर बालकों में, बीमार बालकों में
Ø संवेगात्‍मक स्थिरता किन बालकों में देखी जातीहै प्रतिभाशाली बालकों में
Ø किस परिवार में बालक में संवेगात्‍मक स्थिरता उत्‍पन्‍न होगी सुरक्षित परिवार में, प्रतिभाशाली परिवारमें, सुखद परिवार में
Ø माता-पिता का किस प्रकार का व्‍यवहार बालकों के लिए संवेगात्‍मक स्थिरता प्रदान करता है सकारात्‍मक
Ø किस सामाजिक स्थिति के बालकों में संवेगात्‍मक अस्थिरता पायी जाती है निम्‍न आर्थिक स्थिति में, गरीब एवं दलित परिवारों में
Ø एक बालक को अपने किये जाने वाले कार्यों पर समाज में प्रशंसा एवं पुरस्‍कार प्राप्‍त नहीं होता है, तो उसका व्‍यवहार होगा संवेगात्‍मक अस्थिरता से परिपूर्ण
Ø बालकों में संवेगात्‍मक स्थिरता उत्‍पन्‍न करने के लिए शिक्षक को करना चाहिए सकारात्‍मक व्‍यवहार एवं आत्‍मीय व्‍यवहार
Ø संवेगात्‍मक स्थिरता उत्‍पन्‍न करने के लिए विद्यालय में छात्रोंको प्रदान करना चाहिए पुरस्‍कार, प्रेरणा, प्रशंसा
Ø विद्यालय में संवेगात्‍मक स्थिरता प्रदान करने के लिए किस प्रकार की गतिविधियां आयोजित करनी चाहिए पिकनिक, खेल, पर्यटन
Ø संवेगात्‍मक अस्थिरता प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रूप से प्रभावित करती है शारीरिक विकास को, मानसिक विकास को, सामाजिक विकास को
Ø आश्‍चर्य संवेग का उदय एक बालक में किस मूल प्रवृत्ति के कारण होता है जिज्ञासा
Ø समाजीकरण एवं व्‍यक्तिकरण एक ही प्रक्रिया के पहलू है।यह कथन है मैकाइवर का
Ø विद्यालय समाज का लघु रूप है।यह कथन है ड्यूवी का
Ø वह प्रक्रिया जिससे बालक अपने समाज में स्‍वीकृत तरीकों को सीखता है तथा अपने व्‍यक्तित्‍व का अंग बनाता है।उसे कहते हैं सामाजिक परिवर्तन
Ø बालक के समाजीकरण की सबसे महत्‍वपूर्ण संस्‍था है परिवार
Ø बालक के समाजीकरण के लिए प्राथमिक व्‍यक्ति कहा गया है माता को
Ø बालक के समाजीकरण चक्र का अन्तिम पड़ाव बिन्‍दु अपने में समाहित करता है पास-पड़ोस को
Ø समाजीकरण एक प्रकार का सीखना है, जो सीखने वाले को सामाजिक कार्य करने के योग्‍य बनाता है।यह कथन है जॉनसन का
Ø समाजीकरणका आशय रॉस के अनुसार बालकों में कार्य करने की इच्‍छा विकसित करना है समूह में अथवा एक साथ कार्य करने में
Ø समाजीकरण को सामाजिक अनुकूलन की प्रक्रिया किस विद्वान ने स्‍वीकार की है रॉस ने
Ø समाजीकरण के माध्‍यम से व्‍यक्ति समाज का कैसा सदस्‍य बनता है मान्‍य, कुशल, सहयोगी
Ø एक बालक की समाजीकरण की प्रक्रिया किस परिस्थिति में उचित होगी पोषण में
Ø एक परिवार में बालकों के साथ सहानुभूति एवं प्रेम व्‍यवहार किया जाता है, परन्‍तु बालक के कार्यों को सामाजिक स्‍वीकृति नहीं मिल पाती है, ऐसी स्थिति में होगा मन्‍द समाजीकरण
Ø विद्यालय में समाजीकरण की प्रक्रिया के लिए बालकों को कार्यदिया जाना चाहिए सामूहिक कार्य
Ø समाजीकरण में प्रमुख रूप से सहयोगी तथ्‍य है सहकारिता
Ø निम्‍नलिखित में किस देश के बालक में समाजीकरण की प्रक्रिया पायी जाती है भारतीय बालकों में
Ø बालकों की सामाजिक कार्य में भाग लेने की अनुमति मिलने पर समाजीकरणकी प्रक्रिया होती है तीव्र
Ø जिस समाज में सामाजिक विज्ञान शिक्षण को प्रथम विषय के रूप में मान्‍यता प्रदान की जाती है उस समाज में बालक की समाजीकरणकी प्रक्रिया होती है तीव्र व सर्वोत्‍तम
Ø समाजीकरण की प्रक्रिया में प्रमुख रूप से योगदान होता है पुरस्‍कार का एवं दण्‍ड का
Ø विद्यालय में किस प्रकार का शिक्षण समाजीकरण का मार्ग प्रशस्‍त करता है गतिविधि आधारित शिक्षण, खेल आधारित शिक्षण समूह शिक्षण
Ø समाजीकरण की प्रक्रिया में योगदान होता है मूल प्रवृत्ति एवं जन्‍मजात प्रवृत्यिों का, बालक के व्‍यक्तित्‍व का
Ø मानव जैविकीय प्राणी से सामाजिक प्राणी कब बन जाता है सामाजिक अन्‍त:क्रिया द्वारा, समाजीकरण द्वारा, सामाजिक सम्‍पर्क द्वारा
Ø सामान्‍य रूप से बालकों द्वारा अमर्यादित आचरणों को नहीं सीखा जाता है सामाजिक अस्‍वीकृति
Ø परिवार को झूले की संज्ञा किसने दी गोल्‍डस्‍टीन ने
Ø बालक की परिवार में समाजीकरण की प्रक्रिया सम्‍भव होती है अनुकरण द्वारा
Ø विद्यालय में बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया होती है आपसी अन्‍त:क्रिया द्वारा, विभिन्‍न संस्‍कृतियों के मेल द्वारा, विभिन्‍न सभ्‍यताओं के मेल द्वारा
Ø गोल्‍डस्‍टीन के अनुसार समाजीकरण की प्रक्रियासम्‍भव होती है सामाजिक विश्‍वास एवं सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व द्वारा
Ø किस समाज में रहने वाले बालक का समाजीकरण तीव्र गति से सम्‍भव होता है शिक्षितसमाज में
Ø खेलकूद में समाजीकरण की प्रक्रिया की तीव्रताका आधार होता है अन्‍त:क्रिया, प्रे‍म एवं सहानुभूति, सहयोग
Ø जिस समाज में रीति-रिवाज एवं परम्‍पराओंका अभाव पाया जाता है मन्‍द
Ø निम्‍नलिखितमें से किस स्‍थान के बालक की समाजीकरण प्रक्रिया तीव्र गति से होगी मथुरा

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