![]() |
| Individual Differences and Special Child |
नमस्कार दोस्तों ,
आपकी Paper ki taiyari ( http://paperkitaiyari.blogspot.com/
) अच्छी चल रही होगी और आप लोगो के कहने पर आज हम बाल विकास एवं
शिक्षाशास्त्र ( Child Development and Pedagogy ) भाग-12 व्यक्तिगत
विभिन्नताऐं एवं विशिष्ट बालक (Individual Differences and Special Child) पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नो (One Liner) की श्रखला लेकर आये है
आशा है की आपके लिए मठपूर्ण सिद्ध होगी वर्तमान में मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती ,राजस्थान शिक्षक भर्ती,उत्तरप्रदेश शिक्षक भर्ती की
पात्रता परीक्षा होने वाली है जिनमे इन प्रशनो का अहम् रोल होगा ,सभी प्रकार की शिक्षक भर्ती के लिए यह विषय अत्यंत आवश्यक है आगे भी हम इस
विषय से सम्बंधित नोट्स ,पीडीऍफ़ उपलब्ध करने वाले है इसी तरह
आप हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये
Ø निम्नलिखित
में से कौन-सा कारक जटिल बालकों की जटिलताओं को जन्म नहीं देता है – अच्छी संगत
Ø बालापराध
के कारण है – वंशानुक्रमीय वातावरण, समाज व पारिवारिक वातावरण, विद्यालय का वातावरण
Ø निम्न
में से बालापराध का कारण नहीं है – वंशानुक्रम,
मन्दबुद्धिता, निर्धनता
Ø विकलांक
बालकों से हम – समझते हैं, जो
शारीरिक दोष रखते हैं।
Ø ”चोरी करना जन्मजात है। इसके पीछे बालक की संचय करने की मनोकामना छिपी
रहती है।” उक्त कथन है – कॉलेसनिक का
Ø प्रतिभाशाली
बालकों में कौन-सा मानवीय गुण होता है – सहयोग,
ईमानदारी, दयालुता
Ø ”प्रतिभावान लड़के घर में बैठना पसन्द करते है तथा अधिक क्रियाशील तथा
झगड़ालू होते है।” उक्त कथन है – ट्रो
का
Ø जो
बालक समाज में मान्य, उपयोगी एवं किसी प्रकार का
नवीन मौलिक कार्य करते है, ऐसे बालक कहलाते है – सृजनशील
Ø प्लेटो
ने कब कहा था कि उच्च बुद्धि वाले बालको का चयन करके उन्हें विज्ञान, आदि की शिक्षा देनी चाहिए – 2000 वर्ष पूर्व
Ø ”व्यवहार के सामाजिक नियमो से विचलित होने वाले बालक को अपराधी कहते है।”
उक्त कथन है – एडलर का
Ø मनोनाटकीय
विधि के प्रवर्तक कौन हैं – ट्रो
Ø ”वह हर बच्चा जो अपनी आयु स्तर के बच्चो में किसी योग्यता में अधिक हो
और जो हमारे समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण नई देन दे, प्रतिभाशाली
बालक है।” उक्त कथन है – कॉलेसनिक का
Ø निरीक्षण
और मापन पर विशेष बल देने वाला सम्प्रदाय है – व्यवहारवाद
Ø शिक्षा
में संवेगों का क्या महत्व है – बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व
पर प्रभाव पड़ता है।
Ø ”मूल प्रवृत्तियां चरित्र निर्माण करने के लिए कच्ची सामग्री है। शिक्षक
को अपने सब कार्यों में उनके प्रति ध्यान देना आवश्यक है।” यह कथन है – रॉस का
Ø मूल
प्रवृति क्रिया करने का बिना सीखा स्वरूप है। जैसे-मूल प्रवृत्ति है – काम
Ø ”आदत एक सामान्य प्रवृति है। इस प्रवृत्ति का शिक्षा में सफलतापूर्वक
उपयोग किया जा सकता है।” यह कथन है – रॉस
का
Ø मैकडूगल
ने अनुकरण के कई प्रकार बताए हैं। निम्न में से कौन-सा उनमें से नहीं है – अचेतन अनुकरण
Ø बालक
चेतन रूप से सीखने का प्रयास करता है – अनुकरण
द्वारा
Ø समंजन
दूषित होता है – कुण्ठा से एवं संघर्ष से
Ø अधिगम
में उन्नति पूर्ण सम्भव है – सिद्धान्त रूप में
Ø ‘An
Introduction to Social Psychology’ नामक पुस्तक में ‘मूल प्रवृत्तियो के सिद्धान्त’ का प्रतिपादन सन् 1908 में किसने किया था – मैक्डूगल ने
Ø चिन्तन
शक्ति का प्रयोग देने का अवसर देते है – तर्क,
वाद-विवाद, समस्या-समाधान
Ø बालक
का समाजीकरण निम्नलिखित तकलीक से निर्धारित होता है – समाजमिति तकनीक
Ø मूल
प्रवृत्तियों में जिसका वर्गीकरण मौलिक और सर्वमान्य है, वह है – मैक्डूगल
Ø समायोजन
की विधियां है – उदात्तीकराण्,
प्रक्षेपण, प्रतिगमन
Ø समायोजन
दूषित होता है – कुण्ठा से व संघर्ष से
Ø एक
समायोजित व्यक्ति की विशेषता नहीं है – वैयक्तिक
उद्देश्यों का प्रदर्शन
Ø बालक
के लिए मानसिक स्वास्थ्य के विकास के लिए पाठ्यक्रम होना चाहिए – रुचियों के अनुकूल
Ø वैयक्तिक
विभिन्नता का मुख्य कारण निम्नलिखित में से है – आयु
एवं बुद्धि का प्रभाव
Ø बालक
को सीखने के समय ही जिस क्रिया को सीखना होता है, टेपरिकॉर्डर
पर रिकॉर्ड करके उसका सम्बन्ध मस्तिष्क से कर दिया जाता है। यह कथन है –
सुप्त अधिगम
Ø निम्न
में से अधिगम की विधियां है – ये विधि
Ø ”अपनी स्वाभाविक त्रुटियों के कारण वैज्ञानिक विधि के रूप में निरीक्ष्ाण
विधि अविश्वसनीय है।” यह कथन है – डगलस
एवं हालैण्ड का
Ø साक्षात्कार
को माना जाता है – आत्मनिष्ठ विधि
Ø साक्षात्कार
मे कम-से-कम व्यक्तियों की संख्या होती है – दो
Ø किसी
उद्देश्य से किया गया गम्भीर वार्तालाप ही साक्षात्कार है। यह कथन है – गुड एवं हैट का
Ø साक्षात्कार
को समस्या समाधान के रूप में किस विद्वान ने परिभाषित किया है – जे. सी. अग्रवाल ने
Ø साक्षात्कार
का स्वरूप होता है – विभिन्न प्रकार का
Ø नैदानिक
साक्षात्कार का प्रमुख उद्देश्य होता है – समस्या के
कारणों की खोज, घटना के कारणों की खोज
Ø व्यक्तियों
को रोजगार प्रदान करने से पूर्व किया गया साक्षात्कार कहलाता हैं – नैदानिक साक्षात्कार
Ø शोध
साक्षातकार का उद्देश्य होता है – शोधकर्ता के
ज्ञान की परीक्षा
Ø एक
बालक को शिक्षक के द्वारा पढ़ने के लिए सलाह दी जाती है तथा पढ़ाई में आने वाली
विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाता है। इस प्रकार के साक्षात्कार को माना
जायेगा –
परामर्श साक्षात्कार
Ø निम्नलिखित
में कौन-सी प्रविधि साक्षात्कार से सम्बन्धित है – निर्देशात्मक
प्रविधि, अनिर्देशात्मक प्रविधि
Ø साक्षात्कार
का प्रथम सोपान है – समस्या की जानकारी प्राप्त
करना।
Ø क्रो
एण्ड क्रो के अनुसार साक्षात्कार का प्रयोग किया जाता है – निर्देशन में
Ø किस
विद्वान ने साक्षात्कार को परामर्श की प्रक्रिया माना है – रूथ स्ट्रैंग ने
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य साक्षात्कार की दशाओं से सम्बन्धित है – उचित वातावरण, आत्मीय व्यवहार, पर्याप्त समय
Ø ग्रीनवुड
के अनुसार प्रयोग प्रभाव होता है – उपकल्पना
का
Ø उपकल्पना
का निर्माण प्रयोग का सोपान है – द्वितीय
Ø ”चर वह लक्षण या गुण है जो विभिन्न प्रकार के मूल्य ग्रहण कर लेता है।”
यह कथन है – पोस्टमैन का तथा ईगन का
Ø प्रयोग
के परिणाम में जांच होती है – उपकल्पना की
Ø विवरणात्मक
विधि में तथ्य या घटनाओं को एकत्रित किया जाता है – विवरणात्मक
रूप में
Ø विकासात्मक
पद्धति का द्वितीय नाम है – उत्पत्तिमूलक विधि
Ø गर्भावस्था
से किशोरावस्था तक बालकों की वृद्धि एवं विकास का अध्ययन सम्बन्धित है – विकासात्मक विधि से
Ø मानसिक
उपचारों एवं बौद्धिक अवनति से सम्बन्धित तथ्यों का अध्ययन करने वाली विधि को
किस नाम से जाना जाता है – उपचारात्मक विधि
Ø गिलफोर्ड
द्वारा चिन्तन का माना गया है – प्रतीकात्मक व्यवहार
Ø वैलेन्टाइन
ने चिन्तन को स्वीकार किया है – श्रृंखलाबद्ध विचारों के
रूप में
Ø गैरेट
के अनुसार चिन्तन है – रहस्यपूर्ण व्यवहार
Ø गैरेट
चिन्तन में प्रतीकों के अन्तर्गत सम्मिलित करता है – बिम्बों को, विचारों को, प्रत्ययों
को
Ø चिन्तन
है –
संज्ञानात्मक क्रिया
Ø चिन्तन
की आवश्यकता होती है – समस्या समाधान के लिए
Ø एक
बालक कक्षा में अमर्यादित व्यवहार करता है तो शिक्षक को उसकी गतिविधि के आधार पर
उसके बारे में करना चाहिए – चिन्तन एवं विचार
Ø परीक्षा
में सही प्रश्न का उत्तर याद करने के लिए छात्रों द्वारा की जाती है – चिन्तन
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य चिन्तन के साधनों से सम्बन्धित है – प्रतिमा, प्रत्यय, प्रतीक
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य चिन्तन के साधनों से सम्बन्धित नहीं है – प्रतीक
Ø कक्षा
में बालक शहीद भगत सिंह की प्रतिमा को देखकर चिन्तन करता है तो वह चिन्तन के किस
साधन का प्रयोग करता है – प्रतिमा
Ø शिक्षक
द्वारा क से कलम तथा अ से अनार बताया जाता है तो छात्र कलम एवं अनार के बारे में
चिन्तन करता है। शिक्षक द्वारा चिन्तन की प्रक्रिया में चिन्तन के किस साधन का
प्रयोग किया गया – प्रत्यय
Ø + के चिन्ह को देखकर छात्र इसके विभिन्न पक्षों पर चिन्तन प्रारम्भ कर
देता है। इसका यह प्रयास चिन्तन के किस साधन का प्रयोग माना जायेगा – प्रतीक एवं चिन्ह
Ø एक
छात्र अपने शिक्षक को देखकर उसके गुण एवं व्यवहार के बारे में चिन्तन करने लगता
है,
चिन्तन का यह स्वरूप कहलायेगा – प्रत्यक्ष
चिन्तन
Ø एक
बालक कक्षा अध्यापक को देखकर कहता है कि सर आ गये बालक के चिन्तन का यह स्वरूप
कहलायेगा – प्रत्यक्षात्मक चिन्तन
Ø किस
शिक्षा शास्त्री ने विचारात्मक चिन्तन को ही प्रमुख रूप से स्वीकार किया है – फ्रॉबेल ने
Ø एक
शिक्षक गृहकार्य न करने वाले छात्रों के बारे में पूर्ण चिन्तन करने के बाद उनको
गृहकार्य करके लाने में प्रेरित करते हुए इस समस्या का समाधान करता है उसका यह
चिन्तन माना जायेगा – विचारात्मक चिन्तन
Ø विभिन्न
प्रकार के शैक्षिक अनुसन्धान एक आविष्कार से सम्बन्धित चिन्तन को सम्मिलित
किया जा सकता है – सृजनात्मक चिन्तन
Ø चित्त
की योग्यता निर्भर करती है – बुद्धि पर
Ø चिन्तन
की योग्यता सर्वाधिक पायी जाती है – प्रतिभाशाली
बालक में
Ø जिस
बालक में ज्ञान के प्रति रुचि होगी उसका चिन्तन स्तर होगा – सर्वोत्तम
Ø चिन्तन
के विकास हेतु बालक को किस विधि से शिक्षण करना चाहिए – समस्या समाधान विधि
Ø बालक
के समक्ष समस्या प्रस्तुत करने से बालक में विकास होगा – चिन्तन का
Ø जो
छात्र तार्किक दृष्टि से कमजोर होते हैं अर्थात् तर्क का स्तर सामान्य से कम
होता है उनका चिन्तन होता है – सामान्य से कम
Ø निम्नलिखित
में किस तथ्य का चिन्तन में महत्वपूर्ण योगदान होता है – रुचि, तर्क, बुद्धि
Ø गैरेट
के अनुसार तर्क का सम्बन्ध होता है – क्रमानुसार
चिन्तन से
Ø बुडवर्थ
के अनुसार तर्क है – तथ्य एवं सिद्धान्तों का
मिश्रण
Ø स्किनर
के अनुसार तर्क का आशय है – कारण एवं प्रभावों के सम्बन्धों
की मानसिक स्वीकृति से
Ø तर्क
द्वारा प्राप्त किया जा सकता है – निश्चित
लक्ष्य
Ø तर्क
में किसी घटना के बारे में खोजा जाता है – घटना का
कारण
Ø तर्क
में प्रमुख भूमिका होती है – पूर्व ज्ञान की, पूर्व अनुभव की, पूर्व अनुभूतियों की
Ø तर्क
में प्रमुख प्रकार माने जाते हैं – दो
Ø आगमन
तर्क में सर्वप्रथम प्रस्तुत किया जाता है – उदाहरण
Ø गाय
नाशवान है, पक्षी नाशवान है, मनुष्य
नाशवान है, अत: यह तर्क दिया जा सकता है कि सभी नाशवान हैं।
यह तर्क सम्बन्धित है – आगमन तर्क से, निगमन तर्क से
Ø निगमन
तर्क में पहले प्रस्तुत किया जाता है – नियम
Ø सभी
नाशवान हैं इसलिए तर्क दिया जा सकता है कि सभी नाशवान हैं। इस तर्क वाक्य का सम्बन्ध
है –
निगमन तर्क से
Ø शिक्षक
को तर्क शक्ति के लिए छात्रों में विकसित करना चाहिए – आत्मविश्वास, क्रियाशीलता, उत्साह
Ø एक
शिक्षक द्वारा बालक के सभी प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है इससे बालक में विकसित
होगी –
तर्कशक्ति
Ø शिक्षक
द्वारा बालक के प्रश्नों का उत्तर न देने से कुप्रभावित होगा – तार्किक विकास, शैक्षिक विकास, मानसिक विकास
Ø उपलब्धि
परीक्षण का द्वितीय नाम है – निष्पत्ति परीक्षण
Ø उपलब्धि
परीक्षण को एक अभिकल्प के रूप में किस विद्वान ने स्वीकार किया है – फ्रीमैन
Ø गैरिसन
के अनुसार उपलब्धि परीक्षण मापन करता है – वर्तमान
योग्यता, विशिष्ट योग्यता
Ø उपलब्धि
परीक्षण का शिक्षा विशेष के बाद प्राप्ति का मूल्यांकन किस विद्वान ने माना है – थार्नडाइक ने तथा हैगन ने
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य बालक के उपलब्धि परीक्षण से सम्बन्धित है – ज्ञान की सीमा का मूल्यांकन, बालकों की योग्यता का
मापन, बालक के शैक्षिक विकास का मूल्यांकन
Ø उपलब्धि
परीक्षणों के प्रमुख प्रकार हैं – दो
Ø प्रमाणित
परीक्षणों में समावेश होता है – वैधता, विश्वसनीयता, विश्लेषण
Ø प्रमाणित
परीक्षणों को निर्माण किया जाता है – विशेषज्ञ
द्वारा
Ø प्रमाणित
परीक्षणों की एनॉस्टासी के अनुसार प्रमुख विशेषता है – प्रशासन में एकरूपता एवं गणना में एकरूपता
Ø थार्नडाइक
एवं हैग के अनुसार प्रमापीकृत परीक्षणों की विशेषता है – समान निर्देश, समान समयसीमा, समान
प्रश्न
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य शिक्षक निर्मित परीक्षण प्रकारों से सम्बन्धित है – आत्मनिष्ठता तथा वस्तुनिष्ठता
Ø निबंधात्मक
एवं मौखिक परीक्षणों को सम्मिलित किया जाता है – आत्मनिष्ठ
परीक्षणों द्वारा तथा वस्तुनिष्ठ परीक्षणों द्वारा
Ø चिन्तन
एवं तर्क के विकास हेतु उपयोगी परीक्षण है – निबंधात्मक
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य निबंधात्मक परीक्षण के गुणों से सम्बन्धित है – प्रशासन में सरलता, प्रगति का मूल्यांकन, विचार अभिव्यक्ति में स्वतन्त्रता
Ø मूल्यांकन
करने वाला किस परीक्षण में अपनी विचारधारा से प्रभावित हो जाता है – निबन्धात्मक परीक्षण में
Ø व्यक्तिनिष्ठता
का दोष किस परीक्षण में पाया जाता है – निबन्धात्मक
परीक्षण में
Ø निम्नलिखित
तथ्यों में कौन-सा तथ्य निबन्धात्मक परीक्षण के दोषों से सम्बन्धित है – सीमित प्रतिनिधित्व, प्रामाणिकता का अभाव, विश्वसनीयता का अभाव
Ø वस्तुनिष्ठ
परीक्षणों के निर्माण में किन विद्वानों का श्रेय माना जाता है – होरास मैन तथा जे. ए. राइस का
Ø वस्तुनिष्ठ
प्रश्नों के मूल्यांकन में निहित होती है – वस्तुनिष्ठता
Ø निम्नलिखित
में कौन से प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रश्नों से सम्बन्धित है – बहुविकल्पीय प्रश्न, सत्य/असत्य प्रश्न,
रिक्त स्थान पूर्ति
Ø सरल
प्रत्यास्मरण पद सम्बन्धी प्रश्न सम्मिलित किये जाते हैं – वस्तुनिष्ठ परीक्षण में
Ø वस्तुनिष्ठ
परीक्षणों के गुणों के रूप में स्वीकार किया जाता है – वैधता को, विश्वसनीयता को, वस्तुनिष्ठता
को
Ø एक
वैध परीक्षण अगुणों का मापन करता है जिसके लिए उसका निर्माण किया है। यह कथन है – कॉलेसनिक का
Ø किस
परीक्षण के माध्यम से विषय वस्तु का व्यापक प्रतिनिधित्व होता है – वस्तुनिष्ठ परीक्षण में तथा निबन्धात्मक परीक्षण में
Ø शैक्षिक
परीक्षणों को प्रयोग प्रमुख रूप से किया जा सकता है – निर्देशन में एवं शैक्षिक परामर्श में
Ø समावेशित
शिक्षा का सम्बन्ध है – विशेष शिक्षा से
Ø समावेशित
शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य किस स्तर के बालकों को शिक्षा की मुख्य धारा से सम्बद्ध
करना है –
मंद बुद्धि बालकों को, विकलांग बालकों को,
वंचित बालकों को
Ø समावेशी
शिक्षा में प्रमुख योगदान किस योजना का है – सर्वशिक्षा
अभियान का
Ø समावेशी
शिक्षा में किस प्रकार के बालकों की शैक्षिक आवश्यकता की पूर्ति की जाती है – विशिष्ट बालकों की
Ø वर्तमान
समय में सभी बालकों को शिक्षा की मुख्य धारा से सम्बद्ध करने का श्रेय जाता है – समावेशी शिक्षा को
Ø समावेशी
शिक्षा में बालकों व व्यक्ति भिन्नता जाननेके लिए प्रयोग किया जाता है – बुद्धि परीक्षणों का
Ø समावेशी
शिक्षा के अनुसार विशिष्ट बालकों की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया प्रभावी बनाने के लिए
आवश्यक है – प्रथम समूह बनाकर शिक्षण
Ø समावेशी
शिक्षा बालकों को किस प्रकार का शिक्षण प्रदान करती है – बहुस्तरीय शिक्षण, प्रत्यक्ष शिक्षण विधियोंका
प्रयोग युक्त शिक्षण
Ø समावेशी
शिक्षा आधारित है – वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर
Ø यदि
कोई बालक धीमी गति से सीखता है तो उसके लिए आवश्यक होगी – समावेशी शिक्षा
Ø समाज
विरोधी प्रवृत्ति निराशावादी बालक के लिए समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत प्रमुख रूप
से विकसित करनी चाहिए – संवेगात्मक स्थिरता, सामाजिक गुणों का विकास
Ø बालकों
के व्यवहार अध्ययन की शिक्षा मनोविज्ञान में विधियों को कितने भागों में विभाजित
किया गया है – पांच भागों में
Ø अन्तर्दर्शन
विधि का स्रोत माना जाता है – दर्शनशास्त्र
Ø आधुनिककाल
में अन्तर्दर्शन के अप्रासंगिक होने के मूल में कारण है – वैज्ञानिकता का अभाव
Ø अन्तर्दर्शन
विधि पूर्णत: स्वीकार की जाती है – आत्मनिष्ठ
विधि के रूप में
Ø आत्मर्दर्शन
विधि में प्रयोगकर्ता एवं विषय होते है – एक
Ø अन्तर्दर्शन
निरीक्षण करने की प्रक्रिया है – स्वयं के मन की
Ø अन्तर्दर्शन
विधि में बल दिया जाता है – स्वयं के मन के अध्ययन पर
Ø बहिर्दर्शन
विधि का सम्बन्ध होता है – बालक के व्यवहार से,
प्रौढ़ के व्यवहार से, बृद्ध के व्यवहार से
Ø बहिर्दर्शन
विधि में प्रयोग किया जाता है – निरीक्षण का एवं परीक्षण
का
Ø निरीक्षण
आंख के द्वारा सम्पन्न की जाने वाली प्रक्रिया है यह कथन है – स्किनर का
Ø बहिर्दर्शन
विधि में व्यवहार का अध्ययन किया जाता है – प्रत्यक्ष
रूप से
Ø बहिर्दर्शन
विधि में निहित है – वैज्ञानिकता
Ø निम्नलिखित
में कौन-सा तथ्य बहिर्दर्शन विधि के दोषों से सम्बन्धित है – निरीक्षणकर्ता का दृष्टिकोण,
शंका उत्पन्न होना, अविश्वसनीयता
और भाग पढ़ने के लिए नीचे क्लिक
करे
General Math के लिये CLICK HERE
General Hindi के लिये CLICK HERE
Vyapam के लिये CLICK HERE
Current Affairs के लिये CLICK HERE
Latest Vacancies के लिये CLICK HERE
Syllabus के लिये CLICK HERE
Free Pdf के लिये CLICK HERE
SSC के लिये CLICK HERE
MPSC के लिये CLICK HERE
General Hindi के लिये CLICK HERE
Vyapam के लिये CLICK HERE
Current Affairs के लिये CLICK HERE
Latest Vacancies के लिये CLICK HERE
Syllabus के लिये CLICK HERE
Free Pdf के लिये CLICK HERE
SSC के लिये CLICK HERE
MPSC के लिये CLICK HERE
हमें से जुड़िये :
यूट्यूब चैनल को
सब्सक्राइब करे CLICKHERE
uttar Pradesh sub inspector and Platoon Commander Recruitment 2021-22 Exam Pattern Syllabus Cut Off Marks
ReplyDelete